
क्या है मामला?
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3 फरवरी 2005 को खाताखेड़ी उप सरपंच चुनाव के दौरान रास्ता रोके जाने की सूचना पर पहुंचे अधिकारियों से कंवरलाल मीणा की बहस हो गई।
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तत्कालीन SDM रामनिवास मेहता ने FIR में बताया कि कंवरलाल ने पिस्तौल तानकर धमकी दी।
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Collector के दखल के बाद FIR दर्ज हुई।
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गिरफ्तारी तीन साल बाद हुई और उसी दिन जमानत भी मिल गई।
केस की टाइमलाइन
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2005: मामला दर्ज
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अप्रैल 2018: ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी किया
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14 दिसंबर 2020: अपील पर तीन साल की सजा सुनाई गई
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1 मई 2025: हाईकोर्ट ने सजा को बरकरार रखा
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7 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार किया
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20 मई 2025: कंवरलाल ने सरेंडर किया
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23 मई 2025: विधानसभा ने सदस्यता रद्द की और चुनाव आयोग को सूचना भेजी
अब क्या हो रहा है?
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जेल में बीमार पड़ने के बाद कंवरलाल अस्पताल में भर्ती हैं।
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इसी बीच उन्होंने राज्यपाल को दया याचिका दी है।
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झालावाड़ पुलिस से इस पर रिपोर्ट मांगी गई, जो तीन दिन में तैयार कर ली गई है।
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साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी भी की जा रही है।
निष्कर्ष:
कंवरलाल मीणा को अब तक किसी भी अदालत से राहत नहीं मिली। विधानसभा की सदस्यता भी चली गई है। अब उन्होंने राज्यपाल से दया की उम्मीद लगाई है। देखना होगा कि क्या उन्हें कोई राहत मिलती है या नहीं।
