
पूर्व मंत्री ने रखी आपत्तियां
पूर्व मंत्री और विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि इस विधेयक में कई कमियां हैं।
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इसमें हॉस्टलों के लिए अलग नियम बनाने की बात नहीं है।
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एनओसी (No Objection Certificate) के नाम पर होने वाली गड़बड़ियों पर कोई ठोस प्रावधान नहीं है।
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विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग पर ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि अगर बिल को प्रवर समिति को भेजकर सुधार किया जाए तो यह अधिक प्रभावी होगा।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों में कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों की आत्महत्याएं बढ़ी हैं, लेकिन बिल में इसका कोई ठोस समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिर्फ जुर्माने की राशि बढ़ाने और कोचिंग सेंटरों में सीटें तय करने पर ध्यान दिया है, जबकि असली समस्या छात्रों के मानसिक दबाव की है।
हरीश चौधरी का सवाल – ऑनलाइन कोचिंग का क्या?
कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि देश की कोचिंग इंडस्ट्री 12,500 करोड़ से 25,000 करोड़ तक की है, लेकिन असल चिंता छात्रों की होनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोचिंग सेंटर छात्रों को यह नहीं बताते कि यहां पढ़ने से सरकारी नौकरी की गारंटी नहीं है।
हरीश चौधरी ने मांग की कि बिल में ऑनलाइन क्लासेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी शामिल किया जाए, वरना यह कानून अधूरा रहेगा।
फीस नियंत्रण का मुद्दा
निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि कोचिंग सेंटर फीस के नाम पर मनमानी कर रहे हैं, लेकिन बिल में फीस नियंत्रण का कोई प्रावधान नहीं है। उनका कहना था कि जुर्माने की राशि घटाकर सरकार ने कोचिंग सेंटरों को फायदा पहुंचाया है।
नतीजा
विपक्ष का मानना है कि यह बिल अपने मूल मकसद – यानी छात्रों की आत्महत्याएं रोकने और अनियमितताओं को खत्म करने – में नाकाम साबित होगा, जब तक इसमें जरूरी बदलाव नहीं किए जाते।
