
इस कानून का उद्देश्य ऐसे मामलों को रोकना है, जहां लोग डर या दबाव में अपनी संपत्ति कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
कानून पर विधानसभा में लंबी चर्चा
इस विधेयक पर विधानसभा में करीब साढ़े चार घंटे तक चर्चा हुई। चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि इस कानून में किसी भी धर्म, समुदाय या पूजा पद्धति का उल्लेख नहीं है। यह कानून सामाजिक न्याय, सुरक्षा और संतुलन को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
अशांत क्षेत्र कैसे घोषित होगा
सरकार प्रशासनिक रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर किसी क्षेत्र, कॉलोनी या वार्ड को डिस्टर्ब एरिया घोषित कर सकेगी।
यह घोषणा तीन साल के लिए होगी, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया या घटाया भी जा सकता है।
मॉनिटरिंग के लिए बनेगी समिति
डिस्टर्ब एरिया की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक मॉनिटरिंग और सलाहकार समिति बनाई जाएगी। इसमें एक अध्यक्ष और सरकार द्वारा तय किए गए अन्य सदस्य शामिल होंगे।
पलायन रोकने में मदद करेगा कानून
सरकार का कहना है कि दंगे या तनाव के बाद कई लोग डर के कारण अपनी संपत्ति कम कीमत पर बेच देते हैं और उस क्षेत्र से पलायन कर जाते हैं। यह कानून ऐसे मामलों को रोकने और लोगों को सुरक्षा देने के लिए लाया गया है।
बिल के मुख्य प्रावधान
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डिस्टर्ब एरिया में एडीएम की अनुमति के बिना संपत्ति की बिक्री या रजिस्ट्री नहीं होगी।
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बिना अनुमति किया गया संपत्ति हस्तांतरण अमान्य माना जाएगा।
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किसी क्षेत्र की जनसंख्या संरचना में बदलाव भी डिस्टर्ब एरिया घोषित करने का आधार हो सकता है।
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संपत्ति बिक्री से जुड़े आवेदन पर एसडीएम तीन महीने में फैसला करेगा।
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कानून का उल्लंघन करने पर 3 से 5 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
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बैंक या वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखी संपत्ति पर यह नियम लागू नहीं होगा और उसकी नीलामी हो सकेगी।
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अगर किसी समुदाय को हटाने या विस्थापन की कोशिश पाई जाती है तो संपत्ति बिक्री का आवेदन रद्द किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि यह कानून अशांत क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षा देगा और दबाव में होने वाली संपत्ति बिक्री को रोकने में मदद करेगा।
