
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विधानसभा में 280 विधायकों के बैठने की क्षमता वाला नया हॉल बनाने की योजना बनाई जा रही है। अभी सदन में केवल 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है।
जनगणना के बाद होगा परिसीमन
जल्द ही देश में जनगणना होने वाली है। इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी। इस प्रक्रिया में राजस्थान में लगभग 70 नई विधानसभा सीटें जुड़ने की संभावना है।
1977 के बाद नहीं बढ़ी सीटें
राजस्थान में आखिरी बार विधानसभा सीटों की संख्या 1977 में बढ़ाई गई थी, तब सीटें बढ़कर 200 हुई थीं। उसके बाद से अब तक जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई, लेकिन सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ।
राजस्थान में सीटों का इतिहास
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1952: पहला विधानसभा चुनाव – 160 सीटें
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1957: 176 सीटें
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1967: 184 सीटें
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1977: 200 सीटें (आखिरी बार बढ़ोतरी)
विधानसभा में बनेगा सेंट्रल हॉल
विधानसभा परिसर को आधुनिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 14 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की है। इसके तहत दिल्ली की संसद की तरह यहां भी सेंट्रल हॉल बनाया जाएगा, जहां सभी दलों के विधायक एक साथ बैठकर चर्चा कर सकेंगे। यहां चाय, नाश्ता और भोजन की भी व्यवस्था होगी।
विधान परिषद हॉल का भी उपयोग
विधानसभा परिसर में पहले से मौजूद विधान परिषद हॉल को भी विकसित कर मुख्य सदन के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है, अगर सीटों की संख्या बढ़ती है।
राजनीति पर पड़ेगा असर
सीटों की संख्या बढ़ने से राजस्थान की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। नई सीटें बनने से नए और युवा नेताओं के लिए विधानसभा पहुंचने के अवसर बढ़ेंगे। परिसीमन के दौरान जनसंख्या के आधार पर कुछ सीटें एससी/एसटी के लिए आरक्षित हो सकती हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटें सामान्य भी हो सकती हैं।
आगे क्या होगा
परिसीमन की प्रक्रिया जनगणना की रिपोर्ट आने और परिसीमन आयोग के गठन के बाद ही शुरू होगी। संभावना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
