
अब बाकी शहरों में भी होगी जांच
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के निर्देश पर अब कोटा, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा जैसे शहरों में भी रियायती दर पर दी गई जमीनों की जांच शुरू कर दी गई है। मंत्री ने प्रमुख सचिव देबाशीष पृष्टी को इन मामलों की सख्ती से निगरानी करने को कहा है।
सरकार की नजर अब उन ट्रस्टों, संस्थाओं और एनजीओ पर है जिन्होंने सस्ती दर पर जमीन तो ली, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं किया या शर्तों का पालन नहीं किया।
जयपुर की तीन संस्थाएं जिनकी जमीनें वापस ली गईं
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पूरणमल फूलादेवी मेमोरियल ट्रस्ट
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जमीन: 64,890 वर्गमीटर
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उपयोग का उद्देश्य: मेडिकल और हेल्थकेयर
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स्थिति: तय समय पर निर्माण नहीं हुआ, पूरी राशि भी जमा नहीं की। कोर्ट से स्टे ले लिया।
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डॉग शेल्टर, जगतपुरा
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जमीन: 1,000 वर्गमीटर (2022 में दी गई)
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स्थिति: नोटिस देने के बाद भी निर्माण नहीं हुआ, जमीन वापस ली गई।
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एनजीओ कंज्यूमर यूनिटी
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जमीन: 4,900 वर्गमीटर
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स्थिति: कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन तय समय में निर्माण नहीं हुआ। शर्तों के उल्लंघन पर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया।
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मूल उद्देश्य से भटकी योजनाएं
राज्य सरकार ने सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संस्थाओं को रियायती दर पर जमीनें दी थीं, ताकि आम जनता को सुविधाएं मिल सकें। लेकिन कई संस्थाएं इन शर्तों का पालन नहीं कर रहीं।
जांच रिपोर्टों में साफ हुआ है कि कई संस्थाओं ने जमीन तो ले ली, लेकिन तय काम नहीं किया। इससे आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने प्रमुख सचिव के साथ इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
