
क्या था मामला?
एक महिला ने RTI के जरिए अपने पति की जनवरी से मार्च 2024 तक की सैलरी स्लिप और वेतन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। सूचना अधिकारी ने इसे देने से इनकार कर दिया और कहा कि यह तीसरे पक्ष की निजी जानकारी है। बाद में राज्य सूचना आयोग ने भी इसी फैसले को सही ठहराया। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का वेतन, सेवा रिकॉर्ड, संपत्ति और अन्य व्यक्तिगत जानकारी “निजी सूचना” की श्रेणी में आती है। ऐसी जानकारी को बिना किसी बड़े जनहित के साझा नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी बताया कि RTI कानून की धारा 8(1)(j) के तहत निजी जानकारी को सार्वजनिक करने पर रोक है, जब तक कि उससे जुड़ा कोई स्पष्ट और बड़ा जनहित साबित न हो।
RTI से क्या जानकारी मिल सकती है?
RTI के तहत सरकारी नीतियां, खर्च, टेंडर, भर्ती प्रक्रिया जैसी जानकारियां मांगी जा सकती हैं। लेकिन किसी व्यक्ति की सैलरी, बैंक डिटेल या निजी रिकॉर्ड RTI के दायरे में नहीं आते।
यह फैसला निजता के अधिकार और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन को स्पष्ट करता है और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है।
