
नीति आयोग ने फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 जारी किया है। इस रिपोर्ट में ओडिशा को सबसे मजबूत वित्तीय स्थिति वाला राज्य बताया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का प्रदर्शन अच्छा माना गया है, जबकि राजस्थान सहित कुछ राज्य नीचे के स्थान पर रहे हैं।
कर्ज और खर्च से बढ़ रहा दबाव
रिपोर्ट के अनुसार कई राज्यों में कर्ज और जीएसडीपी का अनुपात बढ़ रहा है। राज्यों द्वारा ली जा रही उधारी का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज और उसके ब्याज को चुकाने में खर्च हो रहा है। इससे भविष्य में वित्तीय स्थिति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ रही है।
नीति आयोग ने राज्यों को सलाह दी है कि
-
कर संग्रह बढ़ाया जाए
-
तय खर्चों को संतुलित किया जाए
-
पूंजीगत निवेश की गुणवत्ता सुधारी जाए
राजस्थान की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में वित्तीय दबाव लगातार बना हुआ है।
-
2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य का कुल खर्च लगभग 39 प्रतिशत बढ़ा।
-
बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे तय खर्चों में जा रहा है।
-
2023-24 में राजस्व प्राप्तियों का लगभग 62 प्रतिशत ऐसे खर्चों में चला गया।
-
राज्य की कुल उधारी का 87 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है।
इसके अलावा कच्चे तेल की रॉयल्टी घटने से गैर-कर राजस्व में भी कमी आई है।
मध्य प्रदेश की स्थिति
मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार देखा गया है।
-
राज्य ने 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है।
-
जीएसटी, उत्पाद शुल्क और व्यापार कर से आय बढ़ी है।
-
पूंजीगत खर्च बढ़कर 56,539 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
हालांकि वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान बढ़ने से तय खर्च भी बढ़ रहे हैं और कर्ज चुकाने के लिए उधारी बढ़ती जा रही है।
छत्तीसगढ़ की स्थिति
छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति फिलहाल स्थिर मानी गई है।
-
राज्य के अपने संसाधनों का हिस्सा बढ़कर करीब 52 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
-
केंद्र से मिलने वाले कर और अनुदान का भी संतुलित उपयोग किया गया है।
लेकिन वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे खर्च बढ़ने से सरकार के पास नए विकास कार्यों के लिए कम पैसा बच रहा है।
फिसकल हेल्थ इंडेक्स 2026 (2023-24) रैंकिंग
-
ओडिशा
-
गोवा
-
झारखंड
-
गुजरात
-
महाराष्ट्र
-
छत्तीसगढ़
-
तेलंगाना
-
उत्तर प्रदेश
-
कर्नाटक
-
मध्य प्रदेश
-
हरियाणा
-
बिहार
-
तमिलनाडु
-
राजस्थान
-
केरल
-
पश्चिम बंगाल
-
आंध्र प्रदेश
-
पंजाब
नीति आयोग का कहना है कि मजबूत वित्तीय प्रबंधन और संतुलित खर्च ही राज्यों की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
