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रूस-उत्तर कोरिया डील से मची खलबली: सड़क संपर्क से बढ़ेगा रणनीतिक गठजोड़, हथियार आपूर्ति का रास्ता भी होगा सुगम

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सियोल: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस और उत्तर कोरिया ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों ने अब आपसी रिश्तों को और मजबूत करने के लिए पहली बार सड़क मार्ग के जरिए सीधा संपर्क स्थापित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

इस समझौते के तहत रूस और उत्तर कोरिया सीमा पर एक पुल का निर्माण करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक सरल और तेज़ हो जाएगा। इस सड़क परियोजना को लगभग डेढ़ वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। टुमेन नदी पर बनने वाले इस पुल की लंबाई करीब एक किलोमीटर होगी।

रणनीतिक उद्देश्य और वैश्विक चिंता

यह नया सड़क मार्ग सिर्फ यात्रा और व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर कोरिया पर पहले भी रूस को हथियार और गोला-बारूद भेजने के आरोप लगे हैं। अब जब सीधा जमीनी संपर्क बन जाएगा, तो हथियारों की आपूर्ति और सहयोग की संभावनाएं और अधिक प्रबल हो जाएंगी। यह बात अमेरिका और यूक्रेन समेत पश्चिमी देशों को चिंतित कर रही है।

पहले से ही रूस और उत्तर कोरिया के बीच रेलमार्ग और सीमित हवाई सेवाएं मौजूद हैं। अब सड़क मार्ग का जुड़ना उनके बढ़ते गठबंधन का प्रतीक माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से पर्यटन, व्यापार और लोगों की आवाजाही को भी बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है।

पुल को बताया ‘ऐतिहासिक स्मारक’

गुरुवार को दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में पुल निर्माण की शुरुआत को लेकर संयुक्त समारोह आयोजित किए गए। उत्तर कोरिया के प्रधानमंत्री पाक था सोंग और रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तीन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया। उत्तर कोरियाई मीडिया के अनुसार, प्रधानमंत्री पाक ने इस परियोजना को द्विपक्षीय संबंधों का “ऐतिहासिक स्मारक” बताया।

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