
📌 क्या है कर्मचारियों की मांग?
-
संगठन ने कहा है कि बोनस की गणना 7वें वेतन आयोग के अनुसार होनी चाहिए।
-
आज के समय में लेवल-1 कर्मचारी की रोज की सैलरी करीब ₹930 (बेसिक ₹18,000 + 55% DA) बनती है, लेकिन उन्हें केवल ₹230 रोजाना के हिसाब से बोनस दिया जा रहा है।
-
PLB सीमा ₹7000 प्रति माह पर ही बनी हुई है, जबकि यह कम से कम ₹18,000 + DA के आधार पर होनी चाहिए।
📢 रेल मंत्री और वित्त मंत्री को भेजा गया पत्र
IRTSA ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर यह मांग की है कि:
-
बोनस की अधिकतम सीमा तुरंत बढ़ाई जाए।
-
लेवल-2 और ऊपर के कर्मचारियों के लिए PLB की अलग गणना हो, क्योंकि उनकी जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं।
📊 रेलवे की कमाई बढ़ी, पर बोनस नहीं
-
2023-24 में रेलवे की कुल कमाई ₹2.64 लाख करोड़ थी, जो 2024-25 में बढ़कर ₹2.78 लाख करोड़ हो गई है।
-
इसके बावजूद कर्मचारियों के बोनस में कोई बदलाव नहीं किया गया।
🚨 मुख्य आपत्तियां:
-
2016 से एक ही राशि का बोनस – जबकि महंगाई और वेतन दोनों बढ़ चुके हैं।
-
230 रुपये रोजाना का बोनस – जबकि कर्मचारी की दैनिक सैलरी ₹930 के करीब है।
-
ज्यादा जिम्मेदारी वाले कर्मचारियों के लिए कोई अलग वेटेज नहीं।
-
रेलवे की बढ़ती कमाई का फायदा कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा।
✅ IRTSA की प्रमुख मांगें:
-
बोनस सीमा ₹18,000 + DA के अनुसार तय हो।
-
लेवल-2 और ऊपर के कर्मचारियों के लिए अलग PLB फॉर्मूला बने।
IRTSA के महासचिव केवी रमेश का कहना है कि रेलवे की उत्पादकता और कमाई बढ़ रही है, ऐसे में कर्मचारियों को मिलने वाला बोनस तर्कसंगत और न्यायपूर्ण होना चाहिए।
निष्कर्ष:
रेल कर्मचारियों का कहना है कि अगर वे ज्यादा काम कर रहे हैं, तो उन्हें उसका उचित बोनस भी मिलना चाहिए। सरकार से मांग है कि बोनस की पुरानी सीमा को हटाकर इसे नई सैलरी और महंगाई दर के अनुसार तय किया जाए।
