
जोधपुर से जैसलमेर रवाना होने से पहले दिया बयान
राजे, जैसलमेर के मोहनगढ़ में पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम के निधन पर शोक जताने जा रही थीं। इससे पहले जोधपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सद्भावना और एकजुटता की बात की।
“राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन परिवार और समाज की तरह मेल-जोल और समझदारी जरूरी है। अगर हम लड़ेंगे तो प्रॉब्लम होगी, लेकिन साथ रहेंगे तो हर समस्या सुलझ सकती है।” – वसुंधरा राजे
बाबा रामदेव और रामसा पीर के लिए आस्था जताई
राजे ने जोधपुर में बाबा रामदेव और बाबा रामसा पीर के धार्मिक आयोजनों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत बाबा रामसा पीर के दर्शन से हुई थी।
“मुझे पहला आशीर्वाद भगवान से मिला, फिर जनता का साथ मिला। मैं विश्वास के साथ कहती हूं कि रामसा पीर हर मनोकामना पूरी करते हैं। समय लग सकता है, लेकिन विश्वास नहीं डगमगाना चाहिए।”
हाल के बयानों पर सियासी हलचल
राजे के हाल के बयानों जैसे – ‘वनवास’, ‘धैर्य’ और अब ‘परिवार’ – को उनके राजनीतिक हालात से जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि ये बयान कहीं न कहीं उनके समर्थकों और भाजपा हाईकमान को संदेश देने की कोशिश हैं।
-
28 अगस्त को धौलपुर में एक कथा के दौरान राजे ने कहा था:
“जिसे अपना समझा, वही पराया हो जाता है। लेकिन परिवार की बहू, मां, बेटी को अपना काम करना होता है।”
-
उन्होंने कहा था कि:
“वनवास केवल भगवान राम की कहानी नहीं है। हर किसी के जीवन में वनवास आता है, लेकिन वह स्थायी नहीं होता। राम ने हमें सिखाया कि धैर्य रखना चाहिए।”
निष्कर्ष:
वसुंधरा राजे के बयानों से साफ है कि वो राजनीति में अपने अनुभव और भावनाओं को खुलकर साझा कर रही हैं। ‘परिवार’, ‘सद्भावना’ और ‘धैर्य’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उन्होंने अपने समर्थकों को संकेतों के ज़रिए एकजुटता और संयम का संदेश देने की कोशिश की है। साथ ही, जनता और पार्टी के भीतर अपनी सॉफ्ट पॉलिटिक्स को भी मजबूत किया है।
