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लालसोट कांग्रेस में विवाद बढ़ा: उपसभापति ने पूर्व चेयरमैन को पत्र से दिया जवाब, सोशल मीडिया पर शुरू आरोप-प्रत्यारोप

लालसोट (राजस्थान):
यहां कांग्रेस के नेताओं के बीच अंदरुनी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मामला अब खुलकर सामने आ गया है, जहां एक-दूसरे पर पत्रों और सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाए जा रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

  • 21 अप्रैल को लालसोट पुलिस थाने के पास स्थित एक भूखंड का पट्टा साधारण सभा में बहुमत से खारिज कर दिया गया था। यह पट्टा पूर्व चेयरमैन दिनेश मिश्रा से जुड़ा हुआ था।

  • इसके बाद 31 मई को रक्षा मिश्रा (पूर्व चेयरमैन) ने उपसभापति संतोष स्वामी को पत्र लिखकर पूछा कि क्या उन्होंने ही उनके पति के पट्टे को निरस्त करने का प्रस्ताव रखा था।


उपसभापति का जवाब

  • 7 जून को संतोष स्वामी ने जवाबी पत्र लिखा और कहा कि उन्होंने बोर्ड मीटिंग में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं रखा था।

  • उन्होंने यह भी कहा कि पट्टा व्यक्तिगत था, न कि संगठन से जुड़ा हुआ।

  • संतोष स्वामी ने आरोप लगाया कि पहले पार्टी स्तर पर बात करनी चाहिए थी, लेकिन पत्र को सीधे डाक और सोशल मीडिया पर डाल दिया गया, जो गलत है।

  • उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के साथ खड़े होकर काम किया है और इस तरह के व्यक्तिगत आरोपों की निंदा की।


सोशल मीडिया पर पहुंचा विवाद

  • उपसभापति का यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे यह विवाद अब जनता के सामने आ गया है।

  • इससे साफ हो गया कि कांग्रेस के नेताओं के बीच की खींचतान अब खुलकर सामने आ रही है और यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है।


रक्षा मिश्रा की प्रतिक्रिया

  • रक्षा मिश्रा ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।

  • सोशल मीडिया पर जो पत्र वायरल हुआ है, उसमें कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।

  • उन्होंने कहा कि बोर्ड मीटिंग से पहले सभी पार्षदों को सूचित किया गया था कि पट्टे को लेकर न्यायालय में अपील लंबित है, इसलिए उस पर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए थी।


क्या बोले रक्षा मिश्रा चुनावी हार पर?

  • उन्होंने कहा कि यदि संतोष स्वामी को लगता है कि हार उनके कारण हुई, तो वह उनकी राय है, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में हर पार्षद की मांग के अनुसार बजट में काम करवाया।

  • उन्होंने दावा किया कि सबसे ज्यादा पट्टे संतोष स्वामी के परिवार को उनके कार्यकाल में मिले हैं।

  • कुछ पट्टों में परेशानी थी, लेकिन पूर्व मंत्री परसादीलाल मीना के सहयोग से वो भी बनवाए गए।


निष्कर्ष:
लालसोट कांग्रेस में आपसी खींचतान अब जमीन विवाद और व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंच गई है। पत्राचार और सोशल मीडिया के जरिए यह मुद्दा अब जनता के सामने आ चुका है और पार्टी के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई है।

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