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“वापसी नहीं, सुरक्षा चाहिए”: जयपुर में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की पीएम मोदी से भावुक अपील

pakistani sharnarthi

जयपुर में रहने वाले सैकड़ों पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपील की है कि उन्हें जबरन वापस पाकिस्तान न भेजा जाए, क्योंकि वे अब फिर उस डरभरी जिंदगी में लौटना नहीं चाहते।

पहलगाम हमले के बाद बढ़ा डर

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद केंद्र सरकार की सख्ती के चलते राजस्थान में रह रहे कई पाकिस्तानी शरणार्थियों की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से 109 लोग पहले ही पाकिस्तान लौट चुके हैं, जबकि करीब एक हजार शरणार्थी अब भी जयपुर और अन्य शहरों में डटे हुए हैं। इनमें से 809 लोगों ने लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) के लिए आवेदन कर रखा है।

“वापस लौटना मतलब फिर से वही डर”

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से आए रमेश लाल का कहना है कि उन्होंने धार्मिक उत्पीड़न से तंग आकर अपने परिवार सहित भारत का रुख किया। जयपुर में रहकर वह कढ़ाई का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। लेकिन अब उन्हें डर है कि कहीं उन्हें पाकिस्तान वापस भेजने का आदेश न मिल जाए।

रमेश कहते हैं, “हम भारत को अपना सुरक्षित घर मानते हैं। पाकिस्तान में हमें हर दिन जान के डर में जीना पड़ता था। अब जब यहां चैन की सांस ली है, तो वापस जाने की कल्पना भी डरावनी लगती है।”

“हमें यहीं बसने दीजिए”

रमेश के रिश्तेदार अजमत दास मेघवाल और अन्य शरणार्थियों का भी यही कहना है कि वे भारत में ही रहना चाहते हैं और सरकार से स्थायी नागरिकता या कम से कम लॉन्ग टर्म वीजा की अपील कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी उनके हालात को समझेंगे और इंसानियत के नाते उन्हें भारत में रहने की अनुमति देंगे।

“हम सब कुछ छोड़ चुके हैं”

मानसरोवर कॉलोनी में रह रहे 65 वर्षीय भींगाराम भी पाकिस्तान छोड़कर भारत आए हैं। उनका कहना है, “हमने सब कुछ पीछे छोड़ दिया, अब वापस कैसे जा सकते हैं? हमें सरकार से उम्मीद है कि वह हमारी पीड़ा को समझेगी।”

मोदी सरकार से मानवीय दृष्टिकोण की उम्मीद

यह केवल रमेश या भींगाराम की कहानी नहीं है। राजस्थान में ऐसे सैकड़ों शरणार्थी हैं, जिन्हें भारत सुरक्षित लगता है और जो पाकिस्तान में फिर से जीवन शुरू करने की सोच से कांप उठते हैं। अब वे प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह की ओर आस लगाए बैठे हैं कि कोई ऐसा फैसला लिया जाए, जिससे उनकी जान और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सके।


निष्कर्ष: यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि गहराई से जुड़ा हुआ मानवीय पहलू है, जिसमें शरणार्थी सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व की गुहार लगा रहे हैं।

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