भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही टेस्ट सीरीज में एक ऐसा फैसला देखने को मिला जिसने सभी क्रिकेट प्रशंसकों को हैरान कर दिया। बात हो रही है भारतीय स्पिनर वाशिंगटन सुंदर की, जिन्हें मैच के दौरान गेंदबाजी करने का मौका काफी देर से—69वें ओवर के बाद—मिला। इस फैसले को लेकर कई तरह के सवाल उठे: आखिर ये फैसला कप्तान शुभमन गिल का था या टीम के मेंटर और पूर्व दिग्गज बल्लेबाज गौतम गंभीर का? इस पर अब पूर्व दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज और इस समय भारतीय टीम के साथ काम कर रहे गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने खुद बयान दिया है और इस फैसले के पीछे की वजह को सबके सामने रखा है।
मोर्केल ने बताया कि वाशिंगटन सुंदर को गेंदबाजी देने में कोई जल्दबाज़ी नहीं की गई क्योंकि मैच की स्थिति उस समय तेज गेंदबाजों के लिए ज्यादा मुफीद थी। पिच पर घास और नमी थी, जिससे तेज गेंदबाजों को स्विंग और बाउंस मिल रही थी। टीम मैनेजमेंट का मानना था कि जब तक तेज गेंदबाज विकेट निकाल रहे हैं, तब तक स्पिनरों को इंतजार करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि ये फैसला पूरी टीम मैनेजमेंट का था, जिसमें कप्तान शुभमन गिल, कोच गौतम गंभीर और अन्य सहयोगी स्टाफ भी शामिल थे। इसका मतलब ये नहीं कि किसी एक व्यक्ति की गलती या विशेष निर्णय था।
गौतम गंभीर का कोचिंग में यह स्टाइल रहा है कि वह परिस्थितियों के अनुसार खिलाड़ियों को इस्तेमाल करते हैं। अगर तेज गेंदबाज अच्छी गेंदबाजी कर रहे हों तो वह उन्हें लंबा स्पैल देने में हिचकिचाते नहीं हैं। शायद यही सोच रही होगी कि सुंदर को थोड़ा बाद में लाया जाए ताकि वह ताजा दिमाग और ऊर्जा के साथ असरदार साबित हो सकें। हालांकि वाशिंगटन सुंदर ने बाद में अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन कई विशेषज्ञों और फैंस का मानना था कि उन्हें और पहले लाया जाना चाहिए था। खासकर जब पिच धीमी होने लगी थी, तब स्पिन ज्यादा कारगर साबित हो सकती थी। फिर भी, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह रणनीति टीम की सामूहिक सोच का हिस्सा थी, न कि किसी एक व्यक्ति का फैसला।

