अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को मजबूती देते हुए विदेशी स्टील पर आयात शुल्क (टैरिफ) को 25% से बढ़ाकर 50% करने की घोषणा की है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू स्टील उद्योग को प्रोत्साहित करना और अमेरिकी उत्पादन को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे लाना है।
यूएस स्टील प्लांट से की घोषणा
पेंसिल्वेनिया के वेस्ट मिफ्लिन स्थित यूएस स्टील के मोन वैली वर्क्स-इरविन प्लांट में एक सभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह कदम अमेरिकी निर्माण क्षेत्र और स्टील वर्कर्स के हित में है। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि हम अपने श्रमिकों और अपनी स्टील इंडस्ट्री को प्राथमिकता दें। विदेशी आयात सस्ते दामों पर हमारे बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, और यह हमारे उद्योग के लिए खतरा है।”
महंगे होंगे ऑटो और निर्माण क्षेत्र के उत्पाद
ट्रंप के इस फैसले से जहां अमेरिकी स्टील उत्पादकों को फायदा मिलने की उम्मीद है, वहीं ऑटोमोबाइल, आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की लागत में बढ़ोतरी संभावित है। सरकारी डेटा के अनुसार, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से स्टील उत्पादों की कीमत में पहले ही करीब 16% का इज़ाफा देखा जा चुका है।
निप्पॉन स्टील डील पर भी जताया भरोसा
इस कार्यक्रम का एक और केंद्रबिंदु रहा जापानी कंपनी निप्पॉन स्टील द्वारा यूएस स्टील में निवेश का प्रस्ताव। ट्रंप ने दावा किया कि इस सौदे के बावजूद, कंपनी अमेरिकी नियंत्रण में ही बनी रहेगी। उन्होंने समर्थकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि “यूएस स्टील का स्वामित्व किसी विदेशी हाथ में नहीं जाएगा, यह अब भी अमेरिका की संपत्ति रहेगा।”
स्टील वर्कर्स यूनियन ने जताई आपत्ति
हालांकि, यूनाइटेड स्टीलवर्कर्स यूनियन ने इस सौदे को लेकर अपनी आशंका जाहिर की है। यूनियन का कहना है कि निप्पॉन स्टील ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वह तब तक निवेश नहीं करेगा जब तक उसे यूएस स्टील का पूर्ण स्वामित्व न मिल जाए। यूनियन ने यह भी सवाल उठाया कि ट्रंप का दावा इस स्थिति के खिलाफ है और यदि सौदा पूरा होता है, तो यूएस स्टील अब अमेरिकी कंपनी नहीं कहलाएगी।
क्या बदल जाएगा इस फैसले से?
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घरेलू उद्योग को प्रतिस्पर्धा से राहत मिल सकती है।
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उपभोक्ताओं और निर्माताओं को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।
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राजनीतिक बहस और चुनावी रणनीति में यह मुद्दा चर्चा में रहेगा।
यह टैरिफ बढ़ोतरी एक बार फिर से यह दिखाती है कि ट्रंप की नीति अभी भी राष्ट्रवाद और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देती है, भले ही इसके प्रभाव वैश्विक व्यापार और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी क्यों न पड़े।

