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व्हाइट हाउस में पहली मुलाकात से पहले ही तेवर में नजर आए कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी, ट्रंप के सामने नहीं झुकने का दिया संकेत

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कनाडा के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपने पहले आधिकारिक अमेरिकी दौरे पर मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच हालिया व्यापारिक तनाव और राजनीतिक बयानों के चलते बेहद अहम मानी जा रही है। लेकिन दौरे से पहले ही कार्नी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं।

अमेरिका रवाना होने से पहले बनाई रणनीति

कार्नी ने अमेरिका रवाना होने से पहले ही स्पष्ट कर दिया कि उनकी प्राथमिकता कनाडा के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से कोई भी समझौता सोच-समझकर और कनाडा के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। उन्होंने इस वार्ता को “कठिन लेकिन सकारात्मक” बताया, जो दोनों देशों के बीच व्याप्त मतभेदों को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

ट्रंप के बयानों के बीच बढ़ता द्विपक्षीय तनाव

हाल के समय में ट्रंप द्वारा कनाडा को ’51वां राज्य’ बताए जाने और टैरिफ से जुड़ी सख्त नीतियों ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा किया है। ऐसे में कार्नी की यह यात्रा एक नई कूटनीतिक दिशा का संकेत दे रही है—जहां कनाडा झुकने के बजाय समता और संवाद के आधार पर संबंध स्थापित करना चाहता है।

अमेरिका के विकल्पों की खोज में कार्नी

कार्नी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना चाहती है। इसके तहत वे यूरोप और एशिया के अन्य भरोसेमंद व्यापार साझेदारों से संबंध मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस रुख से यह साफ है कि कार्नी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के जवाब में “बहुपक्षीय साझेदारी” को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

घरेलू एकता की मिसाल पेश की

इस अहम दौरे से पहले कार्नी ने कनाडा के भीतर भी मजबूत राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने चुनाव में विरोध करने वालों और विपक्षी दलों के साथ संवाद की पहल की है। साथ ही, उन्होंने संसद में विपक्ष के नेता पियरे पोइलीवर के लिए विशेष उपचुनाव कराने की पेशकश कर सियासी शिष्टाचार का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

कनाडा की नई छवि गढ़ने की तैयारी

कार्नी की यह यात्रा सिर्फ औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक शैली और आत्मनिर्भर विदेश नीति की झलक है। उनकी रणनीति है—अमेरिका से सम्मानजनक रिश्ते बनाए रखना, लेकिन दबाव में आकर निर्णय न लेना। इस यात्रा के जरिए वे कनाडा की आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखने की कोशिश में हैं।

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