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शुभमन गिल की पहली कप्तानी में भारत ने इंग्लैंड से सीरीज ड्रॉ की, लेकिन सामने आईं 3 बड़ी कमजोरियां

शुभमन गिल ने बतौर भारतीय टेस्ट कप्तान अपने पहले ही बड़े दौरे में शानदार प्रदर्शन किया और आलोचकों को करारा जवाब दिया। इंग्लैंड में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले कई बड़े क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना था कि टीम इंडिया को यहां भारी हार झेलनी पड़ेगी। लेकिन गिल ने अपने बल्ले और दिमाग, दोनों से यह साबित कर दिया कि वह इस जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने सीरीज में सबसे ज्यादा 754 रन बनाए और साथ ही कप्तानी में कई महत्वपूर्ण फैसले लेकर टीम को 2-2 से सीरीज ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि, इस बेहतरीन नतीजे के बावजूद इंग्लैंड दौरे ने टीम इंडिया की तीन बड़ी कमजोरियों को भी सामने ला दिया—नंबर 3 पर भरोसेमंद बल्लेबाज की कमी, खिलाड़ियों की फिटनेस की समस्या और स्पिन विभाग में कुलदीप यादव पर कम होता भरोसा।

1. नंबर-3 की लगातार समस्या

चेतेश्वर पुजारा के टीम से बाहर होने के बाद से भारत के लिए नंबर-3 पोजीशन पर स्थायी बल्लेबाज नहीं मिल सका है। पिछले दो साल में इस जगह पर कई खिलाड़ियों को आजमाया गया—केएल राहुल, शुभमन गिल, करुण नायर और साई सुदर्शन। इंग्लैंड दौरे पर नायर और सुदर्शन को इस पोजीशन पर मौके मिले, लेकिन दोनों बड़े स्कोर बनाने में नाकाम रहे।

नंबर-3 पोजीशन टेस्ट क्रिकेट में बेहद अहम होती है, क्योंकि यहां बल्लेबाज को नई गेंद का सामना करना पड़ता है और पारी को संभालना होता है। लेकिन फिलहाल यह स्थान भारत के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

2. फिटनेस की जटिल चुनौती

भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस पर भी इंग्लैंड दौरे में सवाल उठे। जसप्रीत बुमराह, जो टीम के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाज हैं, वर्कलोड के कारण सिर्फ 3 टेस्ट खेल पाए। लगातार मैच खेलने पर उनकी गेंदबाजी की रफ्तार गिरने लगी और वह आखिरी टेस्ट से बाहर हो गए।

तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी को लंबे समय तक मौका दिया जा रहा था, लेकिन घुटने की चोट ने उन्हें भी बाहर कर दिया। वहीं युवा तेज गेंदबाज आकाशदीप ने शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन सीरीज के बीच में उन्हें पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो गई।

इन चोटों की वजह से चौथे टेस्ट के लिए टीम इंडिया को सही प्लेइंग इलेवन चुनने में काफी मुश्किल हुई। यह साफ संकेत है कि खिलाड़ियों को फिटनेस और रिकवरी पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

3. कुलदीप यादव पर घटता भरोसा

इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के स्क्वाड में कुलदीप यादव अकेले मुख्य स्पिनर थे। हालांकि, बल्लेबाजी में गहराई लाने के नाम पर उन्हें बार-बार बाहर रखा गया। रिस्ट स्पिनर होने के नाते वह इंग्लैंड की पिचों पर असरदार साबित हो सकते थे, लेकिन उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिले।

कुलदीप ने 8 साल पहले टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था, लेकिन अब तक वह सिर्फ 13 टेस्ट ही खेल पाए हैं। कई बार विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि उन्हें लगातार खेलने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन लगता है टीम मैनेजमेंट का भरोसा उन पर पूरी तरह नहीं रह गया है।

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