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शेखपुरा हाउस से आश्रम तक… जानिए कैसे बदला प्रशांत किशोर का राजनीतिक ठिकाना

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शेखपुरा हाउस से आश्रम तक, बदल गया प्रशांत किशोर का राजनीतिक अंदाज

आलीशान दफ्तर छोड़ 15 बीघा कैंप में पहुंचे PK, बिहार की राजनीति में नई रणनीति की चर्चा तेज

चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर एक बार फिर अपने बदले हुए राजनीतिक अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। कभी पटना के चर्चित शेखपुरा हाउस से राजनीति संचालित करने वाले PK अब बिहटा के 15 बीघा में बने आश्रमनुमा कैंप में दिखाई दे रहे हैं। इस बदलाव ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रशांत किशोर ने अचानक अपना ठिकाना और स्टाइल क्यों बदला? क्या यह सिर्फ रहने की जगह का बदलाव है या फिर बिहार की राजनीति में किसी बड़े प्रयोग की तैयारी?

शेखपुरा हाउस से शुरू हुआ था राजनीतिक कंट्रोल रूम

पटना का शेखपुरा हाउस लंबे समय तक प्रशांत किशोर की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता रहा। यहीं से बैठकों, रणनीतियों और जनसंपर्क अभियानों की रूपरेखा तैयार होती थी। नेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया की लगातार आवाजाही के कारण यह जगह राजनीतिक हब बन चुकी थी।

अब बिहटा में ‘आश्रम मॉडल’

अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। बिहटा में बने नए कैंप में फूस की झोपड़ियों के साथ मॉडर्न टेंट और सामूहिक रहने की व्यवस्था की गई है। बताया जा रहा है कि यहां करीब 500 लोगों के रहने की तैयारी है।

इस जगह को कई लोग “राजनीतिक आश्रम”, “विचार शिविर” और “ग्राउंड पॉलिटिक्स लैब” जैसे नाम दे रहे हैं। यहां सादगी और संगठन दोनों का मिश्रण दिखाई देता है।

क्या है PK की नई रणनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर अब “जमीन से जुड़ी राजनीति” की छवि मजबूत करना चाहते हैं। गांव, किसान, युवा और छोटे कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद बनाने की कोशिश इस मॉडल के जरिए दिखाई दे रही है।

सूत्रों के मुताबिक, यहां बैठकों, प्रशिक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों की भी योजना बनाई जा रही है। बिहार चुनावों से पहले इसे संगठन विस्तार और नई राजनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज

सोशल मीडिया पर लोग PK के इस नए अवतार को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे “सादगी की राजनीति” बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे “बड़ा चुनावी प्रयोग” मान रहे हैं।

फिलहाल, शेखपुरा हाउस से बिहटा आश्रम तक का यह सफर बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

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