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शेयर बाजार में टैक्स बचाने के लिए समझें फीफो नियम

शेयर बाजार में निवेश करते समय सिर्फ अच्छे शेयर चुनना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि टैक्स के नियम समझना भी उतना ही जरूरी है। सही जानकारी होने पर निवेशक अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं और मुनाफा बढ़ा सकते हैं। इसी में एक महत्वपूर्ण नियम है फीफो (FIFO – First In, First Out)

शेयर से कमाई के दो मुख्य तरीके

  1. कैपिटल गेन – जब आप शेयर खरीदकर बाद में ज्यादा कीमत पर बेचते हैं, तो जो फायदा होता है उसे कैपिटल गेन कहते हैं।

    • अगर शेयर 12 महीने से कम समय में बेचते हैं तो उस पर 20% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।

    • अगर शेयर 1 साल बाद बेचते हैं, तो उस पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।

    • साल में 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म लाभ पर टैक्स नहीं लगता

  2. डिविडेंड – जब कंपनी अपने मुनाफे का हिस्सा शेयरधारकों को देती है, तो उसे डिविडेंड कहते हैं। इस पर टैक्स आपकी आयकर स्लैब के अनुसार लगता है।

फीफो नियम क्या है?
कई बार निवेशक एक ही कंपनी के शेयर अलग-अलग तारीखों पर खरीदते हैं। ऐसे में जब वे कुछ शेयर बेचते हैं, तो सेबी के नियम के अनुसार सबसे पहले खरीदे गए शेयर को पहले बेचा हुआ माना जाता है। इसे ही फीफो नियम कहा जाता है।

उदाहरण से समझें
मान लीजिए आपने किसी कंपनी के शेयर दो बार खरीदे:

  • 1 फरवरी 2025 को 2000 शेयर 50 रुपये में खरीदे।

  • 1 अगस्त 2025 को 2000 शेयर 75 रुपये में खरीदे।

फिर 27 दिसंबर 2025 को आपने 2000 शेयर 105 रुपये में बेच दिए।

फीफो नियम के अनुसार पहले खरीदे गए 2000 शेयर ही बेचे हुए माने जाएंगे।
इस हिसाब से लाभ होगा:
(105 – 50) × 2000 = 1,10,000 रुपये

चूंकि ये शेयर 1 साल से पहले बेचे गए, इसलिए यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और इस पर 20% टैक्स यानी लगभग 22,000 रुपये देना होगा।

टैक्स बचाने के लिए क्या करें?
अगर आपके सभी शेयर एक ही डीमैट खाते में हैं, तो फीफो नियम के कारण कभी-कभी पुराने और सस्ते शेयर पहले बिके हुए माने जाते हैं। इससे लॉन्ग टर्म टैक्स का फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए निवेश करते समय टैक्स नियमों को समझकर योजना बनाना जरूरी है।

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