
क्या हुआ था संसद में
ममता बनर्जी उस समय कांग्रेस सांसद थीं और उन्होंने बजट में बंगाल के लिए कम विकास परियोजनाओं की घोषणा होने पर नाराजगी जताई। बजट भाषण खत्म होने के बाद उन्होंने गुस्से में अपनी शॉल पासवान की ओर फेंक दी। इसके बाद उन्होंने तुरंत अपना इस्तीफा देने की बात कही, लेकिन स्पीकर ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और माफी मांगने की सलाह दी। बाद में कांग्रेस नेता संतोष मोहन देब की मध्यस्थता से मामला सुलझ गया।
मीडिया में चर्चा और नई पार्टी की शुरुआत
ममता बनर्जी के इस कदम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। हालांकि, कांग्रेस के साथ मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने 1998 में अपनी अलग पार्टी तृणमूल कांग्रेस बनाई।
बंगाल में राजनीतिक सफर
2011 में ममता बनर्जी ने वामपंथियों के 34 साल पुराने शासन को खत्म किया और तब से लगातार टीएमसी की सरकार बंगाल में बनी हुई है। इस बार उनके सामने चुनौती यह है कि वे अपने किले को बचाएं, जबकि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। लेफ्ट और कांग्रेस अब प्रदेश में लगभग खत्म हो गए हैं।
संसद में शॉल फेंकने वाली यह घटना ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की अहम घटना मानी जाती है और उनके नेतृत्व और संघर्ष की पहचान बन गई।
