ममता की पार्टी में एकजुटता पर सवाल, बड़े प्रदर्शन में कम विधायकों की मौजूदगी से बढ़ी चर्चा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की पार्टी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सत्ता से दूर होने के बाद पार्टी के अंदर एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में सिर्फ 35 विधायकों के शामिल होने की बात सामने आने के बाद विपक्ष ने TMC पर निशाना साधा है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सत्ता में रहते हुए जो नेता पार्टी के साथ मजबूती से दिखाई देते थे, वे अब दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। BJP ने दावा किया कि यह संकेत है कि TMC के अंदर असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
वहीं TMC की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन में विधायकों की संख्या को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और जनता के मुद्दों पर सड़क से विधानसभा तक लड़ाई जारी रखेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद किसी भी क्षेत्रीय दल के लिए संगठन को संभालना बड़ी चुनौती होती है। नेताओं की सक्रियता, कार्यकर्ताओं का मनोबल और जनता से जुड़ाव ही तय करता है कि पार्टी आगे कितनी मजबूत वापसी कर पाएगी।
फिलहाल इस मुद्दे ने बंगाल की राजनीति को फिर गरमा दिया है। विपक्ष इसे TMC की कमजोरी बता रहा है, जबकि पार्टी इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार दे रही है।

