
पिता का साया हटने के बावजूद हौसला
मुमताज सिर्फ छह माह की उम्र में अपने पिता लतीफ खान को खो बैठीं। परिवार में छह बहनें हैं, और मुमताज सबसे छोटी हैं। भाई नहीं होने के बावजूद उन्होंने कभी हालात को अपने रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।
शिक्षा और आत्मनिर्भरता
मुमताज ने अपनी माँ मेरादी और चचेरे भाई अमरदीन के सहयोग से उच्च शिक्षा हासिल करने का संकल्प लिया। कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने काम करके अपनी जरूरतें पूरी कीं, ताकि परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े। कठिन परिस्थितियों में उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
व्याख्याता बनने की तैयारी
मुमताज ने एम.ए. और बी.एड. की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब व्याख्याता बनने की तैयारी कर रही हैं।
पुलिस भर्ती में शानदार सफलता
साल 2024 में उन्होंने जैसलमेर पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में ओबीसी वर्ग में दूसरी रैंक और जिले में 25वीं रैंक प्राप्त की। अब उनकी प्रशिक्षण अवधि भी पूरी हो चुकी है।
प्रेरणा का स्रोत
मुमताज बताती हैं कि उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी से मिली। उनका मानना है कि कठिनाइयां चाहे जितनी भी हों, मजबूत इरादों वाले लोग कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
मुमताज की कहानी साबित करती है कि संघर्ष और मेहनत से हर सपना हकीकत बन सकता है।
