
यह स्मारक गांव के बीचोंबीच बनाया गया था, जिसका मकसद नक्सल विचारधारा को फैलाना और ग्रामीणों में डर पैदा करना था। पुलिस ने इसे नक्सल विरोधी अभियान के तहत गिराया। यह स्मारक नक्सलियों की मौजूदगी का प्रतीक बन चुका था, जिससे गांव के लोग डरे-सहमे रहते थे।
पुलिस का कहना है कि इस ऑपरेशन में ग्रामीणों का भी अप्रत्यक्ष समर्थन मिला, जिससे यह साफ होता है कि अब लोग नक्सलियों के प्रभाव से बाहर आना चाहते हैं और शांति व विकास की राह पर चलना चाहते हैं।
सुरक्षा बलों ने बताया कि इंद्रावती नदी पार बसे इस गांव तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह कार्रवाई नक्सलियों के हौसले को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
