
नियमों के मुताबिक, यदि अतिवृष्टि या ओलावृष्टि से 33 प्रतिशत से ज्यादा फसल खराब होती है, तो प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान है।
अब होगा अगला सर्वे
तहसील प्रशासन दूसरे चरण में यह आकलन कर रहा है कि कितने किसान प्रभावित हुए हैं और कुल कितना रकबा नुकसान की चपेट में आया है। इसके लिए गिरदावरी की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
जिन गांवों में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पाया गया है, वहां पैरा 7-डी तैयार किया जाएगा। इसके तहत किसानों के आधार कार्ड, जनाधार कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज एकत्र किए जाएंगे।
सीधे बैंक खाते में मिलेगा मुआवजा
सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किसान ई-मित्र के माध्यम से अपने दस्तावेज डीएमआईएस पोर्टल पर अपलोड कराएंगे। प्रक्रिया पूरी होते ही मुआवजे की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
इन गांवों में ज्यादा नुकसान
प्रशासन के अनुसार नचछई, मायापुर, गंडायता, जैतपुर, छान, गंगानगर, अल्लापुर, बाढ़पुर, बैरना, सुखवास, बहरावण्डा खुर्द, पाली, हरिपुरा, सेवती खुर्द, धर्मपुरी, जयलालपुरा, नरवला, मीना खेड़ी, दौलतपुरा, सुमनपुरा, क्यारदा खुर्द, गंडावर, बोहना, पीपल्दा, विन्जारी, पाउण्डी, सावलपुर, खण्डेवला, सोनकच्छ, फरिया, कटार, गोपालपुरा, बड़ौद, ओन कलां, पादड़ी तोपखाना, अनियाला, बड़वास, पादड़ा वारदार, ओन मीना, सिंगोर कलां, सिंगोर खुर्द, मामरोठ, बड़िका छाहरा, सेवंती कलां, आकोदा, करीरा कलां और करीरा खुर्द समेत कुल 47 गांवों में भारी फसल नुकसान माना गया है।
प्रशासन का बयान
खण्डार तहसीलदार जयप्रकाश रोलन ने बताया कि रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेज दी गई है और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
