सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर सालों तक फैसला नहीं
2021 में दाखिल मामलों पर 2024 तक कार्रवाई लंबित, RTI से हुआ खुलासा
सांसदों के खिलाफ दाखिल अयोग्यता याचिकाओं को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। RTI से मिली जानकारी के अनुसार, साल 2021 में दाखिल की गई कुछ अयोग्यता याचिकाओं पर 2024 तक फैसला नहीं हो पाया। इस खुलासे के बाद संसदीय प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अयोग्यता याचिकाएं आमतौर पर दल-बदल, पद के दुरुपयोग, नियमों के उल्लंघन या अन्य संवैधानिक आधारों पर दाखिल की जाती हैं। ऐसे मामलों में समय पर फैसला होना जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे सांसद की सदस्यता और जनता के प्रतिनिधित्व से जुड़ा सवाल जुड़ा होता है।
RTI खुलासे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर किसी सांसद के खिलाफ गंभीर आरोपों पर फैसला सालों तक लंबित रहता है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अयोग्यता से जुड़े मामलों में तय समयसीमा होनी चाहिए, ताकि फैसले लंबे समय तक न अटके रहें। देरी से न सिर्फ राजनीतिक विवाद बढ़ता है, बल्कि जनता के बीच संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
अब इस खुलासे के बाद मांग उठ सकती है कि सांसदों और विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई और फैसले की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए।
बड़ी बात
RTI से खुलासा हुआ है कि 2021 में दाखिल सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर 2024 तक फैसला नहीं हुआ। यह मामला संसदीय जवाबदेही, पारदर्शिता और समय पर न्याय की जरूरत को फिर सामने लाता है।

