Site icon CHANNEL009

“साइन और सील”: अमेरिका-चीन में दुर्लभ खनिजों के निर्यात को लेकर समझौता

us-china strike deal

वॉशिंगटन/बीजिंग:
व्हाइट हाउस ने गुरुवार को संकेत दिया कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता में एक अहम प्रगति हुई है। दोनों पक्षों के बीच दुर्लभ खनिजों (rare earth elements) की अमेरिकी आपूर्ति को गति देने पर सहमति बनी है।

जिनेवा में मई में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने अस्थायी रूप से एक-दूसरे पर लगाए गए भारी शुल्कों में कुछ राहत देने पर सहमति जताई थी। इसके साथ ही चीन ने गैर-टैरिफ प्रतिबंधों को भी आसान बनाने का वादा किया था, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने बीजिंग पर समझौते के उल्लंघन और निर्यात लाइसेंस को जानबूझकर धीमा करने का आरोप लगाया।

लंदन में बनी कार्यान्वयन रूपरेखा

हालांकि तनाव जारी रहा, लेकिन लंदन में इस महीने हुई बैठक के बाद एक नई रूपरेखा पर सहमति बनी, जिसे व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने “जिनेवा समझौते को लागू करने के लिए अतिरिक्त सहमति” बताया।

इस बयान से कुछ समय पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यक्रम में कहा था कि अमेरिका ने चीन के साथ “अभी-अभी” एक व्यापारिक समझौता किया है, लेकिन उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी। बाद में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने ब्लूमबर्ग टीवी को बताया कि यह वही लंदन में हुई बातचीत का परिणाम है, जिसे अब उच्च-स्तरीय मंज़ूरी मिल चुकी है और यह “साइन और सील” हो चुका है।

9 जुलाई की टैरिफ डेडलाइन पर असमंजस

व्हाइट हाउस ने यह भी संकेत दिया कि 9 जुलाई से लागू होने वाले उच्च शुल्कों (steeper tariffs) को आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “हो सकता है उसे बढ़ाया जाए, लेकिन यह निर्णय राष्ट्रपति को लेना है।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई देश हमारे साथ सौदा नहीं करता, तो राष्ट्रपति उनके लिए एक उपयुक्त शुल्क दर तय कर सकते हैं।”

“जिसके साथ सौदा हुआ, वही बचेगा”

लटनिक ने कहा कि अगले एक-दो सप्ताह में कुछ व्यापारिक समझौतों की घोषणा हो सकती है।

“जिन देशों के साथ समझौते हो चुके हैं, वे लाभ में रहेंगे। बाकी को हम जवाब देंगे,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन देशों को 9 जुलाई तक सौदे में शामिल नहीं किया गया, उन पर शुल्क लागू हो जाएंगे। इसके बाद भी वे चाहें तो अमेरिका से बातचीत कर सकते हैं।

दुर्लभ खनिजों की रणनीतिक अहमियत

रेयर अर्थ मटेरियल्स — जैसे नियोडिमियम, स्कैंडियम और लैन्थेनम — हाई-टेक डिवाइसेज़ और रक्षा उपकरणों के निर्माण में जरूरी होते हैं। चीन इस क्षेत्र में सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि अमेरिका रणनीतिक कारणों से इनकी आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है।

व्हाइट हाउस के मुताबिक यह समझौता आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर बनाने और अमेरिकी तकनीकी व रक्षा जरूरतों को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Exit mobile version