गंगटोक/लाचेन – सिक्किम के ऊपरी इलाकों में हो रही मूसलधार बारिश ने बड़ा कहर बरपाया है। राज्य के चाटन क्षेत्र में भारी भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की वजह से भारतीय सेना का एक कैंप इसकी चपेट में आ गया, जिसमें तीन सैनिकों की जान चली गई, जबकि छह अन्य जवानों का अब भी कोई सुराग नहीं मिला है।
कहां और कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा रविवार शाम लगभग 7 बजे लाचेन के पास स्थित छतन इलाके में हुआ। लगातार बारिश से पहाड़ी इलाके में जमीन खिसक गई, जिससे पास स्थित आर्मी कैंप मलबे में दब गया। भूस्खलन इतना तीव्र था कि जवानों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। सेना के चार अन्य जवान इस घटना में घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए सुरक्षित बाहर निकाला गया।
शहीद जवानों की पहचान
सेना की तरफ से जारी आधिकारिक जानकारी में शहीद हुए तीन कर्मियों की पहचान हवलदार लखबिंदर सिंह, लांस नायक मनीष ठाकुर, और पोर्टर अभिषेक लखड़ा के रूप में हुई है। तीनों के शव मलबे से बरामद कर लिए गए हैं। उनके परिवारों को इस दुखद सूचना के साथ हरसंभव सहायता मुहैया कराई जा रही है।
राहत और बचाव अभियान ज़ोरों पर
सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। मौसम की कठिनाइयों के बावजूद जवानों की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। रेस्क्यू टीमों के अनुसार, मलबा काफी गहरा और फैला हुआ है, जिससे राहत कार्य में समय लग रहा है।
सेना का बयान: “कर्तव्य से पीछे नहीं हटेंगे”
भारतीय सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि इस दुखद घड़ी में शहीदों के परिवारों के साथ खड़ा रहना हमारी ज़िम्मेदारी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद सैनिकों की सुरक्षा, खोज और कल्याण सुनिश्चित करना सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी सैनिकों की कर्तव्यनिष्ठा और संकल्प अडिग है।
निष्कर्ष
यह हादसा एक बार फिर दर्शाता है कि सीमांत इलाकों में तैनात भारतीय जवान न केवल दुश्मनों से बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से भी जूझते हैं। शहीद जवानों को देश हमेशा याद रखेगा और लापता जवानों की सुरक्षित वापसी के लिए पूरे देश की प्रार्थनाएं उनके साथ हैं।

