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राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर तनातनी खुलकर सामने आ गई है। कुछ दिन पहले तक एक मंच पर साथ दिखाई देने वाले बायतु विधायक हरीश चौधरी और शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी अब फिर से आमने-सामने हैं।
क्या है पूरा मामला?
हरीश चौधरी ने शिव विधानसभा क्षेत्र के गंगाला गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, आजाद नगर में अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण के लिए विधायक कोष से 6 लाख रुपये देने की मंजूरी दी। आमतौर पर विधायक अपनी निधि अपने ही क्षेत्र में खर्च करते हैं, लेकिन नियमों के अनुसार निधि का एक हिस्सा राज्य के किसी अन्य क्षेत्र में भी खर्च किया जा सकता है।
इसी प्रावधान के तहत यह राशि दी गई। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि बायतु क्षेत्र के विधायक होकर हरीश चौधरी ने शिव में राशि क्यों दी। इसे कुछ लोगों ने राजनीतिक दखल के रूप में देखा।
रविंद्र सिंह भाटी का पलटवार
रविंद्र सिंह भाटी ने इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बायतु क्षेत्र में कई स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र आज भी झोंपड़ों में चल रहे हैं। वहां भवन की कमी है। ऐसे में पहले अपने क्षेत्र की समस्याएं क्यों नहीं सुलझाई गईं?
भाटी ने यह भी कहा कि जब बायतु में ऐसी स्थिति है तो दूसरे क्षेत्र में पैसा देने का क्या औचित्य है।
पहले दिखी थी नजदीकी
कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में दोनों नेता एक ही मंच पर नजर आए थे। उस दौरान हरीश चौधरी ने कहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद उनके और रविंद्र के बीच कुछ मतभेद रहे, लेकिन अब वे रिश्ते सुधारना चाहते हैं। मंच पर दोनों हंसते-मुस्कुराते भी दिखे थे।
लेकिन चार दिन भी नहीं बीते और फिर से दोनों के बीच राजनीतिक विवाद सामने आ गया।
क्या विधायक अपने क्षेत्र से बाहर पैसा दे सकता है?
विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के नियमों के अनुसार, एक विधायक अपनी वार्षिक निधि का एक निश्चित हिस्सा अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर, लेकिन राज्य के भीतर कहीं भी खर्च कर सकता है। इसके लिए उस क्षेत्र के विधायक की औपचारिक सहमति जरूरी नहीं होती, बशर्ते काम सार्वजनिक हित में हो।
फिलहाल बाड़मेर की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और दोनों नेताओं के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
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