वड़ी दीक्षा का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में वड़ी दीक्षा को संयम और तपस्या के जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाता है। इस दौरान साध्वी को जैन धर्म के पांच महाव्रतों का संकल्प दिलाया जाता है। इनमें अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह शामिल हैं।
कई संत-साध्वी रहेंगे मौजूद
इस कार्यक्रम में आचार्य भगवंत विजय रविरत्नसूरी महाराज के सान्निध्य में दीक्षा समारोह होगा। साथ ही आचार्य निपुणरत्नसूरी, आचार्य जयेशरत्नसूरी और पन्यास वैराग्यरत्न महाराज सहित कई संत-साध्वी भी उपस्थित रहेंगे। साध्वी अनुपमरेखा, विरलरेखा, कुलरेखा, हिरलरेखा और स्नेहलरेखा भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगी।
पावापुरी तीर्थ में दूसरी वड़ी दीक्षा
साध्वी महर्दिरेखाश्री की प्रारंभिक दीक्षा 22 फरवरी को कृष्णगंज में हुई थी। पावापुरी तीर्थ में अब तक 15 दीक्षाएं और एक वड़ी दीक्षा हो चुकी है। 14 मार्च को यहां दूसरी वड़ी दीक्षा आयोजित की जाएगी।
