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‘सीजफायर ने पाकिस्तान को संकट से निकाला’, अफगान नेता अमरुल्लाह सालेह ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर पर रखी राय

amrullah salah

हाल ही में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई ‘बुनयान उल मरसूस’ को लेकर अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सात बिंदुओं में भारत की रणनीतिक और सैन्य मजबूती को रेखांकित किया।

🔹 भारत की रणनीतिक संप्रभुता पर ज़ोर

सालेह के अनुसार, भारत ने संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति जुटाने की कोशिश नहीं की। इसके बजाय, भारत ने आत्मनिर्भरता और रणनीतिक संप्रभुता का परिचय देते हुए सीधे आतंकी ठिकानों पर प्रहार किया। यह दिखाता है कि भारत अब वैश्विक अनुमोदन पर कम और अपने राष्ट्रीय हितों पर ज़्यादा केंद्रित है।

🔹 आतंक और उसके समर्थन के बीच अंतर खत्म

उन्होंने कहा कि भारत ने पहली बार आतंकियों और उनके संरक्षकों – दोनों को एक ही रूप में लिया और कार्रवाई की। इससे पाकिस्तान की छवि पर गहरा असर पड़ा है, खासकर उन तत्वों की जो अब तक परोक्ष रूप से आतंक का समर्थन करते रहे हैं।

🔹 पाकिस्तान की आर्थिक सीमा

सालेह का मानना है कि पाकिस्तान, जो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है, आईएमएफ से कर्ज लेने में सफल तो रहा, लेकिन वह युद्ध जैसी स्थिति को आर्थिक रूप से वहन करने में अक्षम है। युद्ध, केवल संसाधनों से नहीं बल्कि मंशा और क्षमता से भी लड़े जाते हैं, और इस मोर्चे पर पाकिस्तान कमजोर पड़ा।

🔹 भारत ने संयम की सीमा पर किया जवाबी प्रहार

22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अपने रणनीतिक संयम की सीमा पार करते हुए सटीक और संगठित कार्रवाई की। सालेह के अनुसार, पाकिस्तान अब भी पुराने दौर की रणनीति में अटका हुआ है, जबकि भारत ने अपनी नई सैन्य सोच का प्रदर्शन किया।

🔹 पाकिस्तान के प्रमुख ठिकाने असुरक्षित साबित हुए

भारत के हमलों ने पाकिस्तान के तथाकथित ‘अभेद्य’ माने जाने वाले नूर खान एयरबेस और रावलपिंडी जैसे सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा संरचना पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

🔹 धार्मिक प्रभाव की लड़ाई में भारत की जीत

सालेह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस्लामिक उम्माह से सहानुभूति पाने के लिए जो धार्मिक दबाव बनाना चाहता था, वह भी विफल रहा। भारत के उलेमाओं ने खुद सरकार को समर्थन दिया, जिससे पाकिस्तान का धार्मिक नैरेटिव कमजोर पड़ गया। देवबंद भारत में स्थित होने के कारण यह पहल भारत के पक्ष में गई।

🔹 गोपनीयता और सार्वजनिक एकता में भारत आगे

अंतिम बिंदु में सालेह ने भारत की सूचना गोपनीयता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यह चुनौतीपूर्ण होता है, फिर भी भारत की ओर से बहुत कम जानकारियां लीक हुईं, जो राष्ट्रीय एकजुटता और संचालन क्षमता को दर्शाता है।


निष्कर्ष: सीजफायर ने टाला बड़ा टकराव

सालेह के अनुसार, यह सीजफायर पाकिस्तान के लिए एक “राहत की सांस” जैसा रहा। भारत की ओर से कोई मिसाइल हमले, बड़े नागरिक व्यवधान या एयरस्पेस बंदी नहीं देखी गई, जो इस पूरे ऑपरेशन में भारत की नियंत्रित ताकत को दर्शाता है। वहीं पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी।

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