
कार्यक्रम डीआईजी अवनीश के मार्गदर्शन में हुआ, जिसकी अध्यक्षता तृतीय वाहिनी के सेनानी पवन सिंह ने की। उन्होंने कहा कि भले ही जवान सेवा से रिटायर हो जाएं, लेकिन उनका योगदान और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले ये पूर्व सैनिक संगठन की मजबूत नींव हैं।
संघर्ष की कहानियों ने किया प्रेरित
समारोह में पूर्व सैनिकों से खुली बातचीत भी हुई। उन्होंने अपने सेवा काल के अनुभव साझा किए। बर्फीली सीमाओं और कठिन परिस्थितियों में की गई ड्यूटी की बातें सुनकर सभागार तालियों से गूंज उठा। अधिकारियों ने कहा कि पूर्व सैनिकों का अनुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
संगठन हमेशा रहेगा साथ
सेनानी पवन सिंह ने सभी पूर्व सैनिकों के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी अपने पूर्व जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहेगा। सेवा समाप्त होने के बाद भी उनका रिश्ता संगठन से बना रहता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी पूर्व सैनिकों को मंच पर बुलाकर स्मृति चिन्ह दिए गए। कई चेहरों पर गर्व था और कई की आंखों में पुरानी यादें झलक रही थीं। यह दिन वीर जवानों के सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक बन गया।
