सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले शिक्षकों की बड़ी मांग: पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत देने की अपील
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले शिक्षकों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि RTE संशोधन नियम 2017 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को TET (Teacher Eligibility Test) से राहत का लाभ दिया जाए।
शिक्षकों का कहना है कि जिनकी नियुक्ति पुराने नियमों के तहत हुई थी, उन्हें बाद में लागू की गई शर्तों के आधार पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET अनिवार्यता में छूट मिलनी चाहिए, ताकि उनकी नौकरी और सेवा लाभ प्रभावित न हों।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर कई राज्यों में लंबे समय से विवाद चल रहा है। शिक्षक संगठनों ने सरकार और अदालत के सामने यह पक्ष रखा है कि पुराने नियुक्त शिक्षकों को नई पात्रता शर्तों के दायरे में लाना उचित नहीं होगा।
शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में अनुभव को भी मान्यता दी जानी चाहिए।
वहीं, शिक्षा विभाग और कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि TET शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी मानक है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि पुराने मामलों में अलग दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले पर हजारों शिक्षकों की नजर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि अदालत का निर्णय आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों पर बड़ा असर डाल सकता है।
फिलहाल शिक्षक संगठन लगातार अपनी मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन से बातचीत कर रहे हैं और जल्द राहत मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।

