
अदालत के अनुसार, क्रीमी लेयर तय करते समय परिवार की सामाजिक स्थिति, माता-पिता का पद और उनकी नौकरी या पेशे जैसे अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। केवल आय की सीमा देखकर किसी को क्रीमी लेयर घोषित करना सही तरीका नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर की पहचान के लिए बनाए गए सभी मानकों का संतुलित और व्यापक तरीके से पालन किया जाना चाहिए। इससे सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति का सही आकलन हो सकेगा। अदालत की यह टिप्पणी भविष्य में OBC आरक्षण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
OBC क्रीमी लेयर क्या है?
OBC वर्ग के अंदर जो परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से ज्यादा संपन्न होते हैं, उन्हें क्रीमी लेयर कहा जाता है। जिन परिवारों की आय ज्यादा होती है या जिनके माता-पिता ऊंचे सरकारी पदों या प्रभावशाली पेशों में होते हैं, उन्हें इस श्रेणी में रखा जाता है।
सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और पिछड़े लोगों तक पहुंचे। क्रीमी लेयर में आने वाले लोगों को OBC आरक्षण का फायदा नहीं मिलता, जबकि नॉन-क्रीमी लेयर के उम्मीदवारों को इसका लाभ दिया जाता है।
