
एक अध्ययन के अनुसार 45 साल से अधिक उम्र के लगभग 47% लोगों को जोड़ों में दर्द, 31% लोगों को पीठ दर्द और करीब 20% लोगों को पैरों या टखनों में दर्द की समस्या होती है।
सुबह अकड़न क्यों होती है?
रात भर सोते समय शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहता है। इससे मांसपेशियां और जोड़ थोड़े सख्त हो जाते हैं, इसलिए सुबह हल्की अकड़न होना सामान्य है। लेकिन अगर यह समस्या रोज होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह बीमारी का संकेत हो सकता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है?
ऑस्टियोआर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज (नरम कुशन जैसा टिश्यू) धीरे-धीरे घिसने लगता है। जब यह कुशन कमजोर हो जाता है तो हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं। इससे दर्द, सूजन और अकड़न बढ़ जाती है। यह समस्या खासकर 45–50 साल की उम्र के बाद और मेनोपॉज के बाद महिलाओं में अधिक देखी जाती है।
सुबह जोड़ों की अकड़न के मुख्य कारण
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कार्टिलेज का घिसना: जोड़ों के बीच का कुशन कमजोर होने से दर्द और जकड़न बढ़ती है।
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जोड़ों में सूजन: ऑस्टियोआर्थराइटिस में सूजन के कारण सुबह उठते समय अकड़न महसूस होती है।
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लुब्रिकेशन कम होना: जोड़ों में मौजूद द्रव कम होने से उन्हें हिलाना मुश्किल हो जाता है।
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बोन स्पर बनना: हड्डियों के किनारों पर अतिरिक्त हड्डियां बनने से जोड़ सख्त हो सकते हैं।
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उम्र का असर: उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां और जोड़ कमजोर होने लगते हैं।
इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं
हर बार सुबह की अकड़न का कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस ही नहीं होता। इसके पीछे कुछ और वजहें भी हो सकती हैं, जैसे:
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रूमेटाइड आर्थराइटिस
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फाइब्रोमायल्जिया
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विटामिन D की कमी
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गलत बैठने का तरीका या लंबे समय तक बैठना
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर सुबह की अकड़न 30 मिनट से ज्यादा समय तक बनी रहती है या दर्द के साथ सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। साथ ही अगर रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाए या दर्द अचानक बढ़ जाए, तो जांच करवानी चाहिए।
बचाव और देखभाल
हालांकि ऑस्टियोआर्थराइटिस का पूरी तरह इलाज नहीं है, लेकिन सही देखभाल से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। इसके लिए:
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रोज हल्की एक्सरसाइज करें
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वजन को नियंत्रित रखें
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जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपी लें
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डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें
अगर आपको अक्सर सुबह जोड़ों में दर्द या अकड़न महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही देखभाल से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
