
शुक्रवार को जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, तो शेयर बाजार, रुपया और कच्चे तेल के दामों में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली। लेकिन इस मुश्किल समय में सोने ने एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश के रूप में खुद को साबित किया।
शेयर बाजार में गिरावट, फिर थोड़ी रिकवरी
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शुक्रवार सुबह बाजार में तेज गिरावट आई।
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सेंसेक्स 1,300 अंक तक गिरा, लेकिन दिन के अंत में 573 अंक की गिरावट के साथ 81,118 पर बंद हुआ।
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निफ्टी भी 24,500 के नीचे चला गया।
तेल के दाम उछले, सप्लाई चेन पर खतरा
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मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
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ब्रेंट क्रूड 78.50 डॉलर प्रति बैरल तक गया, बाद में थोड़ी गिरावट के साथ 75 डॉलर पर आ गया।
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जेपी मॉर्गन का कहना है कि अगर ईरान का तेल निर्यात घटा, तो कीमतें 120 डॉलर तक जा सकती हैं।
रुपया टूटा, डॉलर के मुकाबले हुआ कमजोर
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शुक्रवार को रुपया 86.13 पर खुला और गिरकर 86.20 तक पहुंच गया।
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दिन के अंत में 86.07 पर बंद हुआ, जो दो महीनों का सबसे कमजोर स्तर है।
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि तनाव बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपया कमजोर हो गया है।
तेल, टायर और पेंट कंपनियों के शेयर गिरे
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तेल महंगा होने से BPCL, HPCL, IOCL जैसी कंपनियों के शेयरों में 1-3% तक की गिरावट आई।
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टायर और पेंट कंपनियों के शेयरों में भी 3-4% की गिरावट दर्ज हुई।
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हालांकि दिन के अंत में कुछ हद तक रिकवरी देखने को मिली।
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वहीं, ड्रोन और शिपिंग कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी रही।
सोना बना सबसे सुरक्षित निवेश
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जब बाकी सभी क्षेत्रों में गिरावट आई, तो सोना एमसीएक्स पर 1,00,403 रुपए प्रति 10 ग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।
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हर संकट में सोना निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प साबित हुआ है।
आंकड़ों में गोल्ड की मजबूती
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2005 से अब तक सोने में 1200% से ज्यादा बढ़त हुई है।
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सेंसेक्स ने इसी दौरान 815% और चांदी ने 669% रिटर्न दिया।
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2008 के आर्थिक संकट, 2011, और 2020 की मंदी में भी सोना फायदे में रहा।
निष्कर्ष:
जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, तो शेयर बाजार और रुपया कमजोर हुए, लेकिन सोने ने निवेशकों को एक बार फिर भरोसा दिलाया। सोना हर बार की तरह संकट के समय सबसे मजबूत सहारा साबित हुआ है।
