[जयपुर]। विधानसभा सत्र के दौरान एक दिलचस्प लेकिन गंभीर मुद्दा सामने आया, जब स्पीकर महोदय ने ‘मंत्रीजी’ से जुड़ा किस्सा सुनाते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा—“विधायक के काबू में घोड़े तो आ जाते हैं, लेकिन अफसर नहीं आते,” जिससे सदन में हलचल मच गई।
हॉस्पिटल में ‘लॉक’ मिला विधायक को
मामला तब और चर्चा में आया जब एक विधायक किसी काम से हॉस्पिटल पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें गेट बंद मिला। बताया गया कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे, जिससे जनप्रतिनिधि को भी इंतजार करना पड़ा।
स्पीकर का तीखा संदेश
स्पीकर महोदय ने इस घटना का जिक्र करते हुए साफ कहा कि जनता के प्रतिनिधियों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने अफसरों को अपनी जिम्मेदारी समझने और समय पर उपस्थित रहने की नसीहत दी।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक विधायक को ही इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी—यह बड़ा सवाल बन गया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है।
निष्कर्ष:
‘मंत्रीजी’ वाला यह किस्सा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर आईना है। अब देखना होगा कि इस पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।

