
गांव-गांव लगाए गए कैंप
अभियान के तहत सरयू/गोमती स्मार्ट मीटरिंग टीम ने गांवों और शहरों में कैंप लगाकर लोगों से सीधे बातचीत की। इसका मकसद स्मार्ट मीटर को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना और डिजिटल बिजली व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाना था।
आरडीएसएस योजना के तहत लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर
आरडीएसएस (रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) के तहत पुराने मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इससे बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है और लाइन लॉस कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
तकनीकी टीमों ने घर-घर जाकर मीटर लगाने की प्रक्रिया समझाई और उपभोक्ताओं के मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराकर बिजली खपत देखने की सुविधा दी।
कई मंडलों में चला विशेष अभियान
अयोध्या, देवीपाटन और सीतापुर मंडल में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में लोग कैंपों में पहुंचे और अपनी शंकाओं का समाधान कराया।
कुछ लोगों में यह भ्रम था कि स्मार्ट मीटर से बिल ज्यादा आएगा। अधिकारियों ने लाइव डेमो देकर बताया कि स्मार्ट मीटर सटीक रीडिंग देता है और बिलिंग पूरी तरह पारदर्शी होती है।
स्मार्ट मीटर से मिलने वाली सुविधाएं
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रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी
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ऑनलाइन और डिजिटल भुगतान
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सटीक और पारदर्शी बिलिंग
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बिजली उपयोग पर बेहतर नियंत्रण
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ओवरलोड और अधिक खपत पर निगरानी
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24×7 ऑनलाइन सेवा
मोबाइल ऐप के जरिए उपभोक्ता अपने बिजली खर्च, बिल और भुगतान की जानकारी आसानी से देख सकते हैं।
चेक मीटर से समझाया अंतर
अभियान के दौरान “चेक मीटर” के माध्यम से पुराने और स्मार्ट मीटर की तुलना दिखाकर समझाया गया कि नई तकनीक ज्यादा सटीक और भरोसेमंद है। इससे मीटर रीडर पर निर्भरता भी कम होती है और पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाती है।
उपभोक्ताओं में बढ़ा भरोसा
कई उपभोक्ताओं ने बताया कि अब वे अपने बिजली खर्च को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पा रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से लोगों को काफी राहत मिली है।
स्मार्ट मीटर पखवाड़ा को बिजली क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बिजली सेवाओं को पारदर्शी, तकनीकी और उपभोक्ता के अनुकूल बनाना है।
