
एक राष्ट्र, एक चुनाव: विचारधारा नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण प्रस्ताव

शहडोल में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” विषय पर एक विचार एवं परामर्श सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर पूर्व जस्टिस रोहित आर्या ने कहा कि यह कोई विचारधारा नहीं, बल्कि एक निर्णायक प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक फायदे-नुकसान से ऊपर उठकर, राष्ट्रहित में यह निर्णय लिया है। अगर यह लागू होता है, तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता को नया लाभ मिलेगा।
लोकतंत्र और चुनाव का महत्व
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भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी पहचान विविधता में एकता है।
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चुनाव प्रणाली, स्वतंत्र और न्यायसंगत समाज के साथ मजबूत राष्ट्र की नींव रखती है।
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संविधान का उद्देश्य बिना भेदभाव के सभी को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकार देना है।
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चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद है।
चुनाव: जनता की आवाज और लोकतंत्र की धड़कन
पूर्व जस्टिस आर्या ने कहा कि चुनाव जनता और शासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। लोकतंत्र का असली अर्थ जनता का शासन है, जिसमें जनता की आवाज ही सबसे ऊपर होती है।
सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख लोग
इस कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष अमिता चपरा, जिला संयोजक हर्षवर्धन सिंह, विधायक मनीषा सिंह, विधायक जयसिंह मरावी, राजेश्वर उदानिया, रविकरण त्रिपाठी, सह संयोजक चन्द्रेश द्विवेदी और अन्य वरिष्ठ नागरिक, समाजसेवी, भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
