
प्रधानमंत्री की ओर से हर राज्य को न्यूक्लियर पावर प्लांट की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने जिलों से जमीन के प्रस्ताव मांगे। सबसे पहले यूएस नगर ने करीब 90 हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उस जमीन के बीच से रेलवे ट्रैक गुजरने के कारण न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने इसे उपयुक्त नहीं माना।
300 एकड़ जमीन की जरूरत
न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए कम से कम 300 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। राज्य सरकार जमीन का चयन करेगी, उसके बाद न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन उसकी जांच करेगा। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही परियोजना आगे बढ़ेगी। अधिकारियों के अनुसार, यूएस नगर की जमीन तकनीकी रूप से सही नहीं पाई गई, इसलिए अब हरिद्वार में विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
बुग्गावाला में जमीन की मांग बढ़ी
हरिद्वार का बुग्गावाला क्षेत्र नेताओं और नौकरशाहों के निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां जमीन के दाम तेजी से बढ़े हैं। कुछ साल पहले जहां जमीन एक लाख रुपये प्रति बीघा थी, वहीं अब यह 50 लाख रुपये प्रति बीघा तक पहुंच चुकी है। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे बनने के बाद इस क्षेत्र में रियल एस्टेट का तेजी से विकास हुआ है।
बिजली उत्पादन में होगा बड़ा फायदा
अगर यह पावर प्लांट बनता है, तो इससे 1000 मेगावाट से ज्यादा बिजली पैदा हो सकती है। इससे उत्तराखंड बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है। राज्य की पीक टाइम बिजली मांग लगभग 2700 मेगावाट प्रतिदिन है, और कई बार बिजली संकट भी देखने को मिलता है। ऐसे में यह परियोजना राज्य के लिए अहम साबित हो सकती है।
