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हरियाणा में ज़मीन के दामों में भारी बढ़ोतरी: 1 अगस्त से लागू होंगे नए कलेक्टर रेट

हरियाणा में रहने वालों और प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए यह बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने 1 अगस्त 2025 से जमीन और संपत्तियों के कलेक्टर रेट (Circle Rate) में 10% से लेकर 50% तक बढ़ोतरी का फैसला किया है। यह इस साल दूसरी बार है जब दरों में इज़ाफा किया जा रहा है। इससे पहले दिसंबर 2024 में कलेक्टर रेट बढ़ाए गए थे।


क्या होता है कलेक्टर रेट?

कलेक्टर रेट वह न्यूनतम सरकारी मूल्य होता है जिस पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री होती है। यह दर जिला प्रशासन तय करता है और इसी के आधार पर रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी वसूली जाती है।


बढ़े हुए रेट का असर क्या होगा?

  • रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी बढ़ेगी

  • प्रॉपर्टी खरीदना महंगा होगा

  • रियल एस्टेट बाजार में मंदी आ सकती है


किन-किन जगहों पर बढ़ेगी दर?

सरकार के अनुसार गुरुग्राम, पंचकूला और फरीदाबाद जैसे शहरों में कलेक्टर रेट बाजार कीमतों से अभी भी काफी कम हैं। इसलिए वहां ये रेट बढ़ाए जा रहे हैं ताकि:

  • काले धन पर रोक लगे

  • सरकारी राजस्व बढ़े

स्लैब सिस्टम के तहत दरों में बढ़ोतरी होगी:

  • 10%

  • 20%

  • 30%

  • 40%

  • 50%


गुरुग्राम में कितना बढ़ा रेट?

  • सेक्टर 42 (DLF कैमेलियास जैसे पॉश इलाकों में):
    पुराना रेट: ₹72,700/वर्ग गज → नया रेट: ₹79,970/वर्ग गज

  • ऑफिस स्पेस: ₹10,080 → ₹11,000/वर्ग फुट

  • रिटेल एरिया: ₹14,400 → ₹15,500/वर्ग फुट

  • राजीव नगर (सेक्टर 13): ₹25,300 → ₹35,000/वर्ग फुट


अतिरिक्त नियम:

  • ग्रुप हाउसिंग: 4 गुना कृषि दर

  • कमर्शियल CLU प्रोजेक्ट: 5 गुना दर

  • पार्क फेसिंग और कोने वाले प्लॉट: अलग से अतिरिक्त चार्ज


जनता की राय ली जा रही है

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं। अंतिम फैसला बृहस्पतिवार को लिया जा सकता है।


प्रॉपर्टी डीलरों में चिंता

  • लगातार दरें बढ़ने से रियल एस्टेट कारोबार धीमा पड़ सकता है

  • लोग नई प्रॉपर्टी खरीदने से पीछे हट सकते हैं


क्यों लिया गया यह फैसला?

  • दरें बाजार के हिसाब से बराबरी पर लाने के लिए

  • राजस्व बढ़ाने और पारदर्शिता लाने के लिए

  • काले धन से हो रही खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए


निष्कर्ष:

1 अगस्त 2025 से हरियाणा में जमीन और संपत्ति खरीदना महंगा होने जा रहा है। जो लोग प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब ज्यादा स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस चुकानी होगी। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन रियल एस्टेट से जुड़े लोगों में इस फैसले से बेचैनी जरूर है।

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