
हाजी इकबाल पर 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं और उन पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। पुलिस और ईडी लंबे समय से उनकी तलाश कर रही है। पहले भी उनकी कई संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।
कैसे हुई कार्रवाई?
हाजी इकबाल के एक मामले की सुनवाई जिलाधिकारी की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के बाद आदेश दिया गया कि उनकी 56 संपत्तियों को कुर्क किया जाए। साथ ही इन संपत्तियों के प्रबंधन के लिए बेहट तहसीलदार को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
प्रशासन का आरोप है कि हाजी इकबाल ने अपने साथियों के साथ मिलकर वन क्षेत्र से खैर की लकड़ी की चोरी, अवैध खनन और सरकारी व गैर-सरकारी जमीनों पर कब्जा कर अवैध संपत्ति बनाई। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
हाजी इकबाल बसपा शासनकाल में सहारनपुर से एमएलसी रहे हैं। उस दौरान उनका खनन कारोबार काफी बड़ा माना जाता था। समाजवादी पार्टी की सरकार के समय भी उनका कारोबार चलता रहा।
लेकिन उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई। उनके बेटों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज हैं।
वकीलों का पक्ष
हाजी इकबाल के वकीलों का कहना है कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा
जिलाधिकारी के अनुसार, इकबाल और उनके बेटों सहित कुछ अन्य लोगों ने मिलकर एक गिरोह बनाया था और अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की। वर्ष 2022 में उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अब प्रशासन ने गैंग लीडर की अवैध कमाई से जुड़ी करीब 56 संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया है।
