
तारीख: 22 अप्रैल 2025
स्थान: अमेरिका
क्या है पूरा मामला?
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ अदालत का रुख कर लिया है। कारण? ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी की 2.2 अरब डॉलर की संघीय फंडिंग को रोक दिया, और इसके टैक्स छूट को भी खत्म करने की धमकी दी है।
क्यों उठाया यह कदम?
व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम कैंपस में यहूदी विरोधी माहौल से निपटने के लिए उठाया गया है। उन्होंने हार्वर्ड से प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधारों की मांग की थी — जैसे कि पाठ्यक्रम, नियुक्तियाँ और दाखिले की प्रक्रिया में बदलाव।
हालांकि, हार्वर्ड ने इस मांग को “स्वतंत्रता में हस्तक्षेप” बताते हुए सख़्ती से खारिज कर दिया।
हार्वर्ड का जवाब
हार्वर्ड के अध्यक्ष एलन एम. गार्बर ने कहा:
“सरकार के इस दबाव से हमारे कैंसर, अल्ज़ाइमर और पार्किंसंस जैसे गंभीर बीमारियों पर चल रहे रिसर्च बुरी तरह प्रभावित होंगे।”
गार्बर ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी किसी भी हाल में अपनी स्वतंत्रता से समझौता नहीं करेगी।
ट्रंप की आलोचना और धमकियाँ
डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी पहले भी हार्वर्ड जैसे शिक्षण संस्थानों को ‘रेडिकल लेफ्ट’ करार दे चुके हैं। ट्रंप ने इन्हें “शिक्षा की जगह नहीं, बल्कि एक पक्षपाती एजेंडा चलाने वाले अड्डे” बताया।
इसके साथ ही, विदेशी छात्रों की एंट्री रोकने की धमकी भी दी गई थी।
हार्वर्ड की आर्थिक ताकत
-
कुल अनुदान (एंडावमेंट): $53.2 अरब (2024 में)
-
सालाना बजट: $6.4 अरब
-
सिर्फ़ रिसर्च पर खर्च: $1 अरब
-
टैक्स में बचत (2023): $158 मिलियन
-
निवेश पर रिटर्न (2024): 9.6%
-
स्टूडेंट्स (2024): लगभग 25,000
हालांकि हार्वर्ड बेहद अमीर है, लेकिन इसके 70% अनुदान फंड विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बंधे होते हैं। इन फंड्स को यूनिवर्सिटी मनमर्जी से खर्च नहीं कर सकती।
बड़ी तस्वीर क्या है?
हार्वर्ड अकेली यूनिवर्सिटी नहीं है जो ट्रंप प्रशासन के निशाने पर है।
-
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी का $1 अरब
-
ब्राउन यूनिवर्सिटी का $510 मिलियन
-
और कोलंबिया यूनिवर्सिटी की $400 मिलियन फंडिंग भी खतरे में पड़ी।
यह मामला सिर्फ़ पैसे का नहीं, बल्कि शैक्षणिक स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव के बीच खिंची लकीर का प्रतीक बन चुका है।
