यरुशलम – यमन से इज़रायल की ओर दागी गई एक और मिसाइल को इज़रायली वायु रक्षा प्रणाली ने समय रहते हवा में ही मार गिराया है। हालाँकि इस हमले में कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है: हूती विद्रोहियों के पास इतने उन्नत हथियार आखिर आ कहाँ से रहे हैं?
रविवार को हुए इस ताज़ा हमले के बाद यरुशलम सहित कई इज़रायली शहरों में सायरन गूंजने लगे। लोगों में दहशत फैल गई, लेकिन समय रहते मिसाइल को ध्वस्त कर दिए जाने से किसी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई। इज़रायली रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह मिसाइल यमन से दागी गई थी और हमला हूती विद्रोहियों की ओर से किया गया।
बढ़ती चिंता: कौन दे रहा है अत्याधुनिक हथियार?
विशेषज्ञों का मानना है कि हूती विद्रोहियों के पास जिस स्तर की मिसाइल और ड्रोन तकनीक देखी जा रही है, वह सामान्य विद्रोही गुटों के लिए उपलब्ध नहीं हो सकती। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे ईरान की तकनीकी और सामरिक मदद हो सकती है। कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आ चुकी है कि ईरान, हूतियों को हथियार और प्रशिक्षण प्रदान करता रहा है।
एक सैन्य विश्लेषक के अनुसार, “यह केवल क्षेत्रीय अस्थिरता का मामला नहीं है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत है। अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस आपूर्ति श्रृंखला की गहराई से जांच करे।”
हमास के समर्थन में किया गया हमला?
हूती गुट का कहना है कि यह मिसाइल हमला गाजा में इज़रायली कार्रवाई के जवाब में किया गया था, जहां हमास और इज़रायल के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। लेकिन चिंता की बात यह है कि हूती हमलों का दायरा अब सिर्फ इज़रायल तक सीमित नहीं है – उन्होंने हाल के महीनों में लाल सागर में कई अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को भी निशाना बनाया है। इनमें से अधिकांश का न तो इज़रायल से कोई संबंध था, न ही फ़िलिस्तीन संकट से।
आगे क्या?
हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत और उनके पास मौजूद हथियारों की क्षमता यह इशारा कर रही है कि पश्चिम एशिया एक नए प्रॉक्सी युद्ध की ओर बढ़ रहा है। अगर समय रहते इन हथियारों की आपूर्ति और उनके स्रोत पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है।

