
घटना का विवरण:
20 अगस्त को हेड कॉन्स्टेबल बाबूलाल बैरवा ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट व्हाट्सएप पर शेयर किया था, जिसमें उन्होंने एएसपी जगदीश व्यास, एसीपी अनिल शर्मा, एसआई आशुतोष, और पत्रकार कमल देगड़ा पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उनका शव मुकुंदपुरा चौकी पर फंदे से लटका हुआ मिला था।
सरकार द्वारा मानी गई सात मांगे:
- एसआईटी टीम का गठन: मामले की जांच के लिए अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश एमएन के नेतृत्व में एक एसआईटी टीम बनाई जाएगी।
- स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग: पुलिस विभाग द्वारा स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी और इसे एक महीने के अंदर पूरा किया जाएगा।
- सेवा परिलाभ और पेंशन: बाबूलाल बैरवा के सेवा परिलाभ, जो लगभग 55 लाख रुपए हैं, उनकी पेंशन आदि की कार्रवाई तुरंत शुरू की जाएगी।
- अनुकम्पा नियुक्ति: बाबूलाल बैरवा के बेटे तनुज गोठवाल को अनुकम्पा नियुक्ति दी जाएगी।
- संविदा नियुक्ति: बाबूलाल बैरवा की बेटी को जयपुर में संविदा पर शीघ्र नियुक्ति दी जाएगी।
- बेटी की देखभाल: बाबूलाल बैरवा की बेटी साक्षी गोठवाल को पुलिस परिवार द्वारा गोद लिया जाएगा और उसकी शिक्षा से लेकर विवाह तक की जिम्मेदारी पुलिस विभाग उठाएगा।
- पंचनामा और दाह-संस्कार की प्रक्रिया: परिवार द्वारा पार्थिव शरीर का पंचनामा, पोस्टमार्टम, और दाह-संस्कार की प्रक्रिया आज ही पूरी की जाएगी।
इस मामले में हेड कॉन्स्टेबल बाबूलाल बैरवा ने अपने सुसाइड नोट में तीन एफआईआर का भी जिक्र किया है, जिनकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।
