
यरुशलम/पेरिस: इजरायल और फ्रांस के बीच राजनयिक तनातनी बढ़ गई है। इजरायल सरकार ने 27 फ्रांसीसी सांसदों और स्थानीय नेताओं के वीजा रद्द कर दिए हैं। ये सभी नेता आगामी दिनों में फिलिस्तीनी इलाकों का दौरा करने वाले थे।
🚫 इजरायल का बड़ा कदम: वीजा रद्द
इजरायली गृह मंत्रालय ने एक विशेष कानून का हवाला देते हुए इन नेताओं के वीजा रद्द किए। इस कानून के तहत सरकार ऐसे किसी भी व्यक्ति को देश में प्रवेश से रोक सकती है जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए।
इन नेताओं में प्रमुख नाम हैं:
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फ्रेंकोइस रफिन (नेशनल असेंबली डिप्टी)
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एलेक्सिस कॉर्बियर
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जूली ओजेन
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सौम्या बोरौहा (कम्युनिस्ट डिप्टी)
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सीनेटर मैरिएन मार्गेट
साथ ही कुछ महापौर और अन्य अधिकारी भी इस सूची में शामिल हैं।
🇵🇸 यात्रा का उद्देश्य था “शांति और सहयोग”
यह पांच दिन की यात्रा यरुशलम में फ्रांसीसी वाणिज्य दूतावास के निमंत्रण पर प्रस्तावित थी। सांसदों ने दावा किया कि उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देना था, ना कि किसी पक्ष का समर्थन।
📢 नेताओं की प्रतिक्रिया
वीजा रद्द होने पर सभी नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा:
“यह सामूहिक सजा है और राजनयिक संबंधों में एक बड़ी दरार डालने वाला कदम है।”
उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन से अपील की कि वह इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाएं और इजरायल से अपना निर्णय वापस लेने की मांग करें।
🌍 पृष्ठभूमि और बड़ा घटनाक्रम
फ्रांस के वामपंथी और पर्यावरण समर्थक दल लंबे समय से फिलिस्तीनी राज्य के गठन का समर्थन करते रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रपति मैक्रोन ने भी इसके पक्ष में बयान दिए थे।
सूत्रों के अनुसार, जून में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान फ्रांस फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता दे सकता है।
इस महीने की शुरुआत में इजरायल ने दो ब्रिटिश सांसदों को भी तेल अवीव एयरपोर्ट से निर्वासित किया था।
