19 जून 2025 | ग़ाज़ा/काहिरा
ग़ज़ा पट्टी में इज़रायली हवाई और ज़मीनी हमलों में बीते 24 घंटों में कम से कम 140 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह तब हुआ है जब वैश्विक मीडिया और अंतरराष्ट्रीय ध्यान अब धीरे-धीरे ईरान-इज़रायल संघर्ष की ओर मुड़ रहा है।
🔺 भुखमरी और हमले का दोहरा संकट
ग़ज़ा में बीते कुछ हफ्तों में सहायता सामग्री की तलाश में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। बुधवार को भी सैकड़ों की भीड़ सहायता ट्रकों की राह में थी, तभी इज़रायली गोलियों और हवाई हमलों में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई।
ज़ेइतून, मघाज़ी रिफ्यूजी कैंप और खान यूनुस में घरों पर हुए हमलों में 21 लोगों की मौत, जबकि खान यूनुस के एक शिविर में 5 और लोगों की जान गई। वहीं, सालाहुद्दीन रोड पर सहायता के इंतज़ार में खड़े लोगों पर हुई फायरिंग में 14 लोग मारे गए।
🔹 इज़रायली सेना की सफाई
इज़रायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) का कहना है कि उन्होंने कई बार चेतावनी दी थी कि यह इलाका सैन्य अभियान का क्षेत्र है। उनका दावा है कि जब भीड़ सैनिकों के क़रीब पहुंची और संभावित खतरा बनी, तो चेतावनी के तौर पर फायरिंग की गई।
IDF का कहना है कि हथियारबंद हमास को निष्क्रिय करना उनका मुख्य उद्देश्य है, लेकिन आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए “उचित सावधानी” बरती जा रही है।
⚠️ ग़ज़ा में भुखमरी का संकट
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, मई के अंत से अब तक ग़ज़ा में 397 लोगों की मौत सिर्फ़ खाने की तलाश में हुई है, जबकि 3,000 से अधिक घायल हुए हैं। भूख और सुरक्षा की कमी अब ग़ज़ा के लोगों के लिए सबसे बड़ा डर बन गई है।
ग़ज़ा के निवासी आदिल कहते हैं:
“हम मर रहे हैं – कभी बम से, तो कभी भूख से। भोजन के लिए लोग अपनी जान दांव पर लगा रहे हैं। हम मिट रहे हैं, और दुनिया अब ईरान की तरफ़ देख रही है।”
🛑 मानवता पर सवाल
UNRWA के प्रमुख फिलिप लाज़ारिनी ने सहायता वितरण के वर्तमान तंत्र को “मानवता पर धब्बा” बताया है। उन्होंने कहा कि भूखे लोगों के मारे जाने की घटनाएं पूरी दुनिया के लिए शर्मनाक हैं।
🔍 अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ग़ज़ा की अनदेखी
ग़ज़ा के लोगों को डर है कि ईरान-इज़रायल युद्ध में तेज़ी के चलते उनके संघर्ष को भुला दिया जाएगा। हालांकि कुछ लोग ईरान द्वारा इज़रायल पर मिसाइल हमलों को लेकर संतोष भी व्यक्त कर रहे हैं, फिर भी वे कहते हैं कि हर दिन इस युद्ध में दर्जनों मासूमों की जान जा रही है।
🆘 वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम की चेतावनी
WFP के अनुसार, पिछले चार हफ्तों में ग़ज़ा में पहुंचाई गई 9,000 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री वास्तव में जरूरत का बहुत ही छोटा हिस्सा है। भारी भीड़ के चलते कई बार रास्तों में ही लोग सहायता ट्रकों को घेर लेते हैं और तब हिंसा होती है।
निष्कर्ष:
ग़ज़ा में जंग ने बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों के जीवन को संकट में डाल दिया है। वैश्विक फोकस अब ईरान-इज़रायल संघर्ष पर केंद्रित होता जा रहा है, लेकिन ग़ज़ा की चीखें भी उतनी ही तीव्र और मानवीय हैं।

