नई दिल्ली/इस्लामाबाद — भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय बाद एक सकारात्मक कूटनीतिक कदम उठने जा रहा है। 1 जुलाई 2025 को दोनों देशों के प्रतिनिधि सीमापार जेलों में बंद नागरिकों और मछुआरों की रिहाई को लेकर पहली बार एक मंच पर बैठेंगे। यह बैठक ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच होने वाली पहली औपचारिक बातचीत होगी।
🗂️ काउंसलर एक्सेस समझौते के तहत होगी बातचीत
यह वार्ता 2008 में हुए काउंसलर एक्सेस एग्रीमेंट के तहत हो रही है, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान हर छह महीने में एक-दूसरे के जेलों में बंद नागरिकों की सूची साझा करते हैं। इसका उद्देश्य कैदियों को कानूनी सहायता दिलाना और उनकी पहचान सुनिश्चित करना होता है।
📌 पाकिस्तानी जेलों में कितने भारतीय कैदी?
14 मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार:
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कुल भारतीय कैदी: 242
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इनमें से 193 मछुआरे हैं
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जबकि 49 अन्य आम नागरिक हैं
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अधिकांश मछुआरे गलती से समुद्री सीमा पार कर जाने के कारण पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं।
📌 भारत की जेलों में कितने पाकिस्तानी कैदी?
इसी अवधि तक भारत में बंद पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या:
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कुल पाकिस्तानी कैदी: 458
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इनमें से 81 मछुआरे हैं
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और 377 सामान्य नागरिक हैं
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यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारत की जेलों में पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या कहीं ज्यादा है।
⚔️ ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनी बातचीत की जमीन
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें PoK और पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, जिनका भारत ने कड़ा और निर्णायक प्रतिकार किया।
हालांकि इस सैन्य टकराव के बीच, पाकिस्तान ने सीजफायर की अपील की और इसके बाद दो बार डीजीएमओ स्तर पर बातचीत हो चुकी है।
🕊️ क्या कैदियों की रिहाई बनेगी शांति की शुरुआत?
1 जुलाई की प्रस्तावित बैठक को दोनों देशों के बीच रिश्तों को फिर से सामान्य बनाने की दिशा में पहला सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि, भारत अब भी आतंकवाद के मुद्दे पर बिना समझौते के सख्त रुख अपनाए हुए है।
🔍 निष्कर्ष:
हालांकि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी गहराया हुआ है, लेकिन कैदियों की रिहाई जैसे मानवीय मुद्दे पर संवाद की पहल यह संकेत देती है कि कुछ मोर्चों पर संवेदनशीलता और सहयोग अब भी संभव है।

