तेहरान/दोहा/वॉशिंगटन – कतर में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर ईरान द्वारा मिसाइल हमला किए जाने के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। इस हमले को लेकर ईरान ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अमेरिका की सैन्य आक्रामकता का जवाब” बताया है, जबकि कतर ने चेतावनी दी है कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल सकते हैं।
🛡️ अमेरिका के परमाणु हमले के जवाब में कार्रवाई: ईरान
ईरान ने स्पष्ट किया कि कतर में स्थित अल-उदीद एयरबेस पर हमला अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के प्रतिशोध में किया गया। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, “इस्लामी गणराज्य ने बिल्कुल उतनी ही संख्या में मिसाइलें दागीं, जितनी बम अमेरिका ने हमारे परमाणु केंद्रों पर गिराए थे।”
ईरानी बयान में यह भी कहा गया कि मिसाइल हमले को आवासीय क्षेत्रों से दूर अंजाम दिया गया, ताकि नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सके। ईरान ने कतर के लोगों को यह भरोसा दिलाया कि यह ऑपरेशन उनके खिलाफ नहीं था।
📣 “हमला ज़रूरी था, पर कतर हमारा मित्र है”: ईरान
ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिवालय ने बयान में कहा,
“यह कार्रवाई ईरान की आत्मरक्षा थी। ऑपरेशन इस तरह से डिजाइन किया गया था कि कतर की जनता या उसकी संप्रभुता को कोई नुकसान न हो।”
ईरान ने इस मिशन को “गुड न्यूज़ ऑफ विक्ट्री” नाम दिया और दावा किया कि यह एक सफल सैन्य जवाबी हमला था।
🛑 कतर ने की आलोचना, दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरानी हमले के बाद कतर की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और प्रधानमंत्री के सलाहकार ने कहा:
“कतर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत, इस हमले की गंभीरता को देखते हुए उचित जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।”
कतर ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइल हमले को सफलतापूर्वक विफल कर दिया और नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
🌍 “अब ज़रूरत है संवाद की, न कि युद्ध की”: कतर
कतर ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने की अपील करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और वार्ता की मेज पर लौटने का अनुरोध किया। उन्होंने इजरायल की “आक्रामक नीति” को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बताते हुए कहा कि कतर सबसे पहले देशों में से था जिसने इस संभावित टकराव की चेतावनी दी थी।
“हम सैन्य कार्रवाइयों को रोकने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की वकालत करते हैं।” – कतर विदेश मंत्रालय

