इस्लामाबाद – पाकिस्तान में कम उम्र की लड़कियों की शादी पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित कानून ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार इस कानून के जरिए 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी को दंडनीय अपराध घोषित करना चाहती है। हालांकि, इस कदम को लेकर धार्मिक संगठनों और कुछ कट्टरपंथी राजनीतिक दलों की ओर से कड़ा विरोध सामने आया है।
⚖️ क्या है प्रस्तावित कानून?
सरकार का इरादा बाल विवाह पर सख्त रोक लगाने का है। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करता है या ऐसी शादी कराने में सहयोग करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम लाखों लड़कियों के भविष्य की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है।
📊 1.9 करोड़ बाल वधुओं वाला देश
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में वर्तमान में लगभग 1.9 करोड़ लड़कियां ऐसी हैं जिनकी शादी बाल्यावस्था में कर दी गई थी। यह आंकड़ा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि सरकार के सामने एक गंभीर सामाजिक संकट को भी उजागर करता है।
🕌 विरोध की अगुवाई फजल उर रहमान के हाथ में
इस कानून के विरोध की कमान जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख और पूर्व गृह मंत्री मौलाना फजल उर रहमान ने संभाल रखी है। उनका तर्क है कि यह कानून इस्लामिक काउंसिल की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने संसद में सरकार पर आरोप लगाया कि “एक ऐसे समय में जब भारत के साथ सीमा पर तनाव है, सरकार ऐसा कानून ला रही है जो देश को बांट देगा।”
📢 क्या बोले विरोधी नेता?
फजल उर रहमान ने सरकार को चेताया कि यदि इस कानून को वापस नहीं लिया गया, तो सड़क पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कानून आम लोगों की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है और इससे सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है।
🔎 निष्कर्ष:
पाकिस्तान में बाल विवाह पर रोक लगाने का प्रस्ताव सामाजिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, लेकिन इसका धार्मिक और राजनीतिक विरोध सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। अब देखना यह होगा कि शहबाज सरकार इस मुद्दे पर सुधार बनाम परंपरा की लड़ाई में किस तरह संतुलन बनाती है।

