
ट्रंप के फैसलों से हिल गए विश्वविद्यालय, छोटे कॉलेजों पर संकट मंडराया
वॉशिंगटन | अप्रैल 2025
अमेरिका में विश्वविद्यालयों को लेकर ट्रंप की तीखी बयानबाज़ी और नीतियों ने हायर एजुकेशन सेक्टर को हिला कर रख दिया है। जहां हार्वर्ड, कोलंबिया और टफ्ट्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान ट्रंप के सीधे निशाने पर हैं, वहीं इनकी आड़ में छोटे कॉलेजों पर अस्तित्व का संकट गहरा गया है।
प्रोफेसर डैन कैसिनो के अनुसार, प्रतिष्ठित संस्थान शायद इस संकट को झेल जाएं, लेकिन जो कॉलेज भारत और चीन जैसे देशों के छात्रों पर निर्भर हैं – वे अब अपने दरवाजे बंद करने की कगार पर हैं।
🎓 छोटे कॉलेज, बड़ी परेशानी
अमेरिका में हर साल लाखों इंटरनेशनल छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय छात्रों का होता है। हार्वर्ड या एमआईटी जैसे संस्थानों में तो गिनती के लोग पहुंचते हैं, असली संख्या उन यूनिवर्सिटी में है जो कम रिसोर्स वाले हैं – जैसे University of Texas at Arlington, Arizona State University या SUNY Albany।
ट्रंप प्रशासन ने इन संस्थानों के लिए फंडिंग घटा दी है, वीज़ा नियम कड़े कर दिए हैं और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण बना दिया है।
⚠️ ट्रंप की सख्ती का असर: क्यों खतरे में हैं कॉलेज?
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विदेशी छात्रों की फीस से ही चलते हैं कई यूनिवर्सिटी
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स्टेट यूनिवर्सिटीज़ घाटे में, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स से ली जाती है ज़्यादा फीस
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शिक्षा बजट में कटौती, रिसर्च और ऑपरेशन ठप होने का खतरा
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बढ़ती राजनीतिक दखलअंदाज़ी से छात्रों में डर का माहौल
ट्रंप ने हार्वर्ड को ‘वामपंथियों का गढ़’ बताया है और वहां के छात्रों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अन्य कॉलेजों में हालात और भी बुरे हैं – कैंपस में विरोध प्रदर्शन करने पर गिरफ्तारी तक की नौबत आ रही है।
🇮🇳 भारतीय छात्रों के लिए बड़ा सवाल: अब क्या करें?
क्या अमेरिका पढ़ाई के लिए अब भी सबसे सही जगह है?
इस सवाल ने अब गंभीर शक्ल ले ली है। डैन कैसिनो कहते हैं कि “असली खतरा हार्वर्ड को नहीं, बल्कि उन संस्थानों को है जो बिना विदेशी छात्रों के ज़िंदा नहीं रह सकते।”
अगर भारत और चीन के छात्र अमेरिका आना बंद कर दें, तो कई यूनिवर्सिटी बंद होने की नौबत में आ जाएंगी।
