वॉशिंगटन:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बचाव किया है और उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार मामले को “राजनीतिक साज़िश” बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक “बिलकुल पागलपन भरा हमला” है, जो न सिर्फ इज़रायल की सुरक्षा बल्कि अमेरिका के हितों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट किया,
“नेतन्याहू एक युद्ध नायक हैं, और उन्होंने ईरान जैसे खतरे को समाप्त करने में अमेरिका के साथ मिलकर बेहतरीन काम किया है। अब, जब वे हमास के साथ बंधकों को छुड़वाने की डील में लगे हैं, उन्हें कोर्ट में बैठाकर वक्त बर्बाद कराया जा रहा है – वो भी सिर्फ सिगार और खिलौनों जैसी बातों पर!”
⚖️ नेतन्याहू पर क्या आरोप हैं?
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2019 में आरोप तय हुए: घूस, धोखाधड़ी और विश्वास के उल्लंघन के गंभीर आरोप
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लग्जरी गिफ्ट: नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर लगभग 2.6 लाख डॉलर मूल्य के सिगार, शराब और गहने स्वीकारने का आरोप
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मीडिया सौदे: दो प्रमुख मीडिया संस्थानों से लाभकारी कवरेज के बदले फायदे देने की कोशिश
2020 में मुकदमा शुरू हुआ, लेकिन गाजा युद्ध के चलते कई सुनवाइयों में देरी हुई। नेतन्याहू ने पिछले दिसंबर में पहली बार गवाही दी थी, और इस महीने से क्रॉस-एग्जामिनेशन शुरू हुआ है।
🗣️ ट्रंप बोले – “मेरे साथ नरक से लौटे हैं बिबी”
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि उन्होंने और नेतन्याहू ने मिलकर ईरान जैसे “चालाक और खतरनाक दुश्मन” से मुकाबला किया और एक “महान जीत” हासिल की।
“बिबी जैसा इज़रायल प्रेमी मैंने नहीं देखा। जो उनके साथ हो रहा है, वो अकल्पनीय है। ये मुकदमा तुरंत खत्म होना चाहिए।”
ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अमेरिका हर साल इज़रायल की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, और इस तरह के मामले “उनकी साझा जीत को धूमिल कर रहे हैं”।
🔁 ट्रंप का यह लगातार दूसरा समर्थन
तीन दिन पहले भी ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा था कि वे “हैरान” हैं कि नेतन्याहू जैसे “महान युद्धकालीन नेता” के खिलाफ अभी भी मुकदमा चल रहा है।
उन्होंने लिखा:
“कोई और होता तो हार मान लेता, लेकिन बिबी ने कभी पीछे नहीं हटे। अमेरिका ने इज़रायल को बचाया — और अब अमेरिका बिबी को भी बचाएगा।”
📍 निष्कर्ष:
नेतन्याहू इज़रायल के इतिहास में पहले मौजूदा प्रधानमंत्री हैं जिन्हें आपराधिक आरोपों में अदालत का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रंप के मुताबिक यह मामला न केवल नेतन्याहू के नेतृत्व पर हमला है, बल्कि अमेरिका और इज़रायल की रणनीतिक साझेदारी को भी कमजोर करता है।

